बुधवार को एक ही दिन में वार के दो फैसलों पर जमकर बवाल मचा और यह तकनीकि अचानक आलोचनाओं के घेरे में आ गई। ज्यादातर विशेषज्ञों ने अर्जेंटीना को पोलैंड के खिलाफ वार की ओर से दी गई पेनाल्टी के फैसले को भी गलत ठहराया। सोशल मीडिया पर तो यहां तक लिखा गया, आखिर कर्म सामने आया, मेसी उस पेनाल्टी पर गोल नहीं कर पाए जो नहीं दी जानी चाहिए थी।
मैच के फैसले को बदलने की मांग
ट्यूनीशिया के खिलाफ गोल करते ग्रीजमैन (नीली जर्सी में)
फ्रेंच फुटबाल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि उनकी ओर से ग्रीजमैन के गोल को गलत तरीके से खारिज किए जाने के खिलाफ फीफा को शिकायत की जा रही है। दरअसल ग्रीजमैन ने जब गोल किया तो गेंद ट्यूनीशियाई रक्षक से टकराते हुए गोल में गई। गोल करने के बाद रेफरी ने खेल को जारी रखा और मैच समाप्ति की सीटी भी बजा दी। मुकाबला 1-1 की बराबरी पर था।
नियम कहते हैं कि रेफरी के खेल जारी रखने के बाद वार किसी फैसले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है। लेकिन उसने ऐसा किया और रेफरी ने गोल को न सिर्फ खारिज किया बल्कि खेल को भी शुरू करा दिया। इसके बाद 40 सेकंड तक खेल हुआ, जबकि वह मैच समाप्ति की सीटी पहले ही बजा चुके थे। नतीजन फ्रांस यह मुकाबला 1-0 से हार गया। फ्रेंच फुटबाल मैच के फैसले को भी बदलने की मांग करेगा।
रेफरी ने गोल देने से इनकार किया
पोलिश गोली का हाथ लगने के दौरान गोल करने की स्थिति में नहीं थे मेसी
इसी घटना के बाद मेसी को पेनल्टी ऑफर किया गया था
इसी तरह अर्जेंटीना और पोलैंड के मैच के 36वें मिनट में जब गोलकीपर वोज्शिएक का हाथ मेसी के चेहरे पर लगा तब तब तक गेंद उनके सिर को पार कर चुकी थी। मेसी को हाथ जरूर लगा, लेकिन हाथ लगने के दौरान वह गोल करने की स्थिति में नहीं थे। बावजूद इसके रेफरी ने इसे वोज्शिएक का फाउल माना को अर्जेंटीना को पेनाल्टी दे दी।
सोशल मीडिया पर वार के इस फैसले के विरोध में आलोचनाओं की बाढ़ सी आ गई। रीप्ले में साफ दिखाई दे रहा था कि यह फैसला संदेहास्पद है। हालांकि वोज्शिएक ने इस फैसले के बावजूद मेसी के लेफ्ट फुटर को शानदार ढंग से रोककर न सिर्फ उन्हें गोल करने से रोका बल्कि जमकर वाहवाही भी लूटी।
मेसी के पेनल्टी शॉट को पोलैंड के गोलकीपर ने रोक लिया था