एशिया का सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट, इंडियन ऑयल डुरंड कप का 134वां संस्करण इस बार पांच राज्यों में आयोजित होगा। मणिपुर की राजधानी इंफाल दो साल के अंतराल के बाद इसकी मेज़बानी करते हुए वापसी कर रही है। इस बार यह टूर्नामेंट 22 जुलाई से 23 अगस्त के बीच होगा। टीमों की संख्या 16 से बढ़कर 24 हो गई है और सभी इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) टीमें अब इसमें हिस्सा लेती हैं।
असम का कोकराझार तीसरे साल भी लगातार मेजबान रहेगा जबकि झारखंड का जमशेदपुर और मेघालय के शिलांग को पिछले साल मेज़बान स्थलों में जोड़ा गया था। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता, जिसे भारतीय फुटबॉल का मक्का कहा जाता है, 2019 से डुरंड कप का मुख्य आधार बना हुआ है और इस साल लगातार छठी बार मुख्य मेज़बान रहेगा। पूर्वी भारत में स्थानांतरण के बाद से, डुरंड कप ने खुद को देश की प्रमुख फुटबॉल प्रतियोगिता के रूप में फिर से स्थापित किया है। टीमों की संख्या 16 से बढ़कर 24 हो गई है और सभी इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) टीमें अब इसमें हिस्सा लेती हैं।
भारतीय सेना की पूर्वी कमान द्वारा तीनों सेनाओं की ओर से आयोजित किया जाने वाला यह टूर्नामेंट विशेष है, क्योंकि इसमें सेनाओं की टीमें देश के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल क्लबों के खिलाफ खेलती हैं। पिछले कुछ वर्षों में इसमें विदेशी सेनाओं की टीमें भी भाग लेने लगी हैं।
भारतीय सेना का लक्ष्य इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट को पूर्वोत्तर भारत तक पहुंचाना है, और इस वर्ष के मेज़बान शहर उसी दिशा में उठाया गया ठोस कदम हैं। सभी राज्य सरकारों और स्थानीय स्वायत्त निकायों ने हमेशा की तरह इस लोकप्रिय टूर्नामेंट को पूर्ण समर्थन देने का वादा किया है, जो इस क्षेत्र के फुटबॉल प्रेमियों की कल्पना का केंद्र बना हुआ है।
यहां खेले जाएंगे मैच
कोलकाता में दो (विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन और किशोर भारती क्रीड़ांगन), मणिपुर की राजधानी (खुमन लम्पक स्टेडियम) इंफाल, रांची या जमशेदपुर (मोरहाबादी स्टेडियम या जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स), शिलांग (जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम) और कोकराझार (साई स्टेडियम) में खेले जाएंगे। उल्लेखनीय है कि नॉर्थईस्ट यूनाइटेड एफसी वर्तमान में गत विजेता है, जिसने पिछले साल रोमांचक फाइनल में मोहन बागान को हराकर अपना पहला खिताब जीता था।