इनफैनटिनो की प्रतिक्रिया
फीफा अध्यक्ष ने ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा कि यह पुरस्कार खेल की वैश्विक भावना और विश्व शांति के प्रयासों का प्रतीक है। उनके मुताबिक, फुटबॉल एक ऐसा माध्यम है जो दुनिया को एकजुट करने की क्षमता रखता है। ट्रंप ने अपने गले में पदक और हाथों में ग्लोब थामे हुए सोने की ट्रॉफी (फीफा विश्व कप ट्रॉफी) के साथ पुरस्कार को स्वीकार किया। अपने भाषण के दौरान, उन्होंने कई वैश्विक संघर्षों को समाप्त करने का श्रेय लिया, जिनमें भारत-पाकिस्तान और रूस-यूक्रेन युद्ध शामिल हैं और खुद को नोबेल शांति पुरस्कार के योग्य उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत किया। हाल के हफ्तों में उन्होंने यू.एस. इंस्टिट्यूट ऑफ पीस का नाम बदलकर 'डोनाल्ड जे. ट्रंप यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ पीस' रख दिया है।
पुरस्कार पर उठे सवाल और विवाद
फीफा ने जोर देकर कहा कि यह निर्णय पांच अरब से अधिक फुटबॉल फैंस की ओर से लिया गया, आलोचकों ने वैश्विक फुटबॉल समारोहों को राजनीतिक संदेशों के साथ जोड़ने की छवि पर सवाल उठाया। इस घोषणा के तुरंत बाद खेल और राजनीति दोनों ही क्षेत्रों में प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। जहां कुछ समर्थक इसे ऐतिहासिक बताते नजर आए, वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या खेल मंच पर राजनीति का इस तरह हस्तक्षेप सही है? कई विशेषज्ञों का मानना है कि फीफा जैसा संगठन राजनीतिक तटस्थता के लिए जाना जाता है, लेकिन यह कदम उस सिद्धांत को चुनौती देता है।
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