अखिल भारतीय फुटबॉल संघ (एआईएफएफ) ने संतोष ट्रॉफी सीनियर राष्ट्रीय फुटबॉल चैंपियनशिप 2018-19 के फाइनल दौर की मेजबानी का न्योता पाकर भी दिल्ली सॉकर एसोसिएशन (डीएसए) असमंजस में पड़ गई है। दिल्ली ने पंजाब को इस होड़ में पछाड़ दिया ।
बदकिस्मती से एआईएफएफ के निरीक्षण दल ने यहां डॉ. अंबेडकर स्टेडियम का गुरुवार को मुआयना करने के बाद डीएसए से कहा कि वह उसे इसकी मेजबानी सौंपने को तैयार है, लेकिन उसे इस चैंपियनशिप के फाइनल दौर के मैच अंबेडकर स्टेडियम की बजाय जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम मे कराने होंगे।
इस चैंपियनशिप के फाइनल दौर के मैच में 1 से 15 अप्रैल या फिर 3 से 15 अप्रैल तक होने हैं। दिल्ली और पंजाब सहित फाइनल दौर के लिए दस टीमें क्वॉलिफाई कर चुकी हैं। इसमें शिरकत करने वाली दस टीमों को पांच-पांच टीमों के दो ग्रुप में बांटा जाएगा।
इस बाबत डीएसए के अध्यक्ष शाजी प्रभाकरन ने 'अमर उजाला' से मंगलवार को कहा, 'हमारे लिए जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में मैच कराना व्यावहारिक ढंग से मुमकिन नहीं है। हमें नेहरू स्टेडियम में मैच कराने के लिए हर दिन एक मैच के लिए एक लाख रुपये देने होंगे। करीब एक पखवाड़े तक चलने वाले इस टूर्नामेंट के लिए यह राशि खासी ज्यादा है।'
उन्होंने आगे कहा, 'हमने देश के मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से गुजारिश की है कि वह हमें नेहरू स्टेडियम में निशुल्क इन मैचों की आयोजन की इजाजत दें। यदि खेल मंत्री इसके लिए तैयार हो जाते हैं तो हम इस चैंपियनशिप के फाइनल दौर के मैचों की की मेजबानी यहां दिल्ली के नेहरू स्टेडियम में कर सकते हैं। अन्यथा हमारे लिए एआईएफएफ की मेजबानी की पेशकश को स्वीकारना मुमकिन नहीं होगा।'
उन्होंने कहा, 'दरअसल हमने एआईएफएफ से कहा कि वह अंबेडकर स्टेडियम में इस चैंपियनशिप के लिए जिन सुविधाओं को जोड़ने की बाबत कहेगी हम उसके लिए तैयार हैं। एक अहम बात यह भी है जितने दर्शक अंबेडकर स्टेडियम में इस चैंपियनशिप के मैच देखने आते हैं उतने जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में नहीं आते हैं। अब अंतिम फैसला एआईएफएफ पर निर्भर है।'
32 बार की चैंपियन बंगाल , 2018 की चैंपियन केरल और मणिपुर जैसे देश की धुरंधर टीमें क्वॉलिफाइंग दौर में हार कर बाहर हो चुकी हैं। दरअसल, दिल्ली को ही सबसे पहले संतोष ट्रॉफी के फाइनल दौर की मेजबानी का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन तब उसने इसमें बहुत रूचि नहीं दिखाई थी। दिल्ली और पंजाब ने उत्तर क्षेत्र से संतोष ट्रॉफी के फाइनल दौर के लिए क्वालिफाई किया है।
दरअसल, दिल्ली ने अपनी टीम के फाइनल दौर के लिए क्वॉलिफाई करने के बाद ही इसकी मेजबानी में जब ज्यादा रूचि दिखाई तो तब पंजाब ने अपना दावा ठोक कर उसके सामने कड़ी चुनौती पेश कर दी थी। दिल्ली को यदि संतोष ट्रॉफी के फाइनल दौर की मेजबानी सौंपी जाती है तो करीब डेढ़ दशक के बाद वह दूसरी और कुल तीसरी बार इसकी मेजबानी करेगी।
दिल्ली ने 2004 में पूरी संतोष ट्रॉफी सीनियर राष्ट्रीय फुटबॉल चैंपियनशिप की मेजबानी की थी। दिल्ली ने आखिरी बार 1944 में जब संतोष ट्रॉफी की मेजबानी की तो खिताब जीता था।
संतोष ट्रॉफी के फाइनल दौर के लिए उत्तर क्षेत्र से दिल्ली और पंजाब, पूर्व क्षेत्र से ओडिशा और सिक्किम, पूर्वोत्तर क्षेत्र से असम और मेघायल, दक्षिण क्षेत्र से सर्विसेज और कर्नाटक, पश्चिम क्षेत्र से गोवा और महाराष्ट्र की सहित दस टीमें क्वॉलिफाई कर चुकी हैं। इसके लिए क्वॉलिफाई करने वाली दस टीमों को पांच-पांच के दो ग्रुप में बांटा जाएगा। दोनों ग्रुप की दो-दो शीर्ष टीमें सेमीफाइनल खेलेंगी। सेमीफाइनलों की विजेता के बीच संतोष ट्रॉफी का फाइनल खेला जाएगा।