अफ्रीका की एकमात्र उम्मीद सेनेगल का सपना टूट गया। 2002 विश्व कप का करिश्माई प्रदर्शन अलियो सिस्से की टीम नहीं दोहरा पाई। कोलंबिया ने 1-0 से सेनेगल को परास्त कर न सिर्फ नॉकआउट में प्रवेश किया बल्कि ग्रुप एच को भी टॉप कर लिया। सेनेगल को अपने पहले विश्व कप के प्रदर्शन को दोहराने के लिए महज ड्रॉ की जरूरत थी, लेकिन येरी मीना ने 74वें मिनट में गोल कर इस अफ्रीकी टीम की उम्मीदों को ध्वस्त कर दिया।
1986 के बाद नहीं होगी दूसरे दौर में अफ्रीकी टीम
अफ्रीकी महाद्वीप के लिए यह विश्व कप किसी बुरे सपने के समान है। 1986 विश्व कप से अंतिम 16 का ग्रुप स्टेज लागू किया गया है। तब हर विश्व कप में अफ्रीकी टीम दूसरे दौर में जगह बनाती आई है, लेकिन इस बार पांच में से कोई भी इस महाद्वीप की टीम अंतिम 16 में जगह नहीं बना पाई। ग्रुप एच में टॉप पर चल रही सेनेगल से सभी को उम्मीदें थीं, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
भारी पड़े ज्यादा फाउल और पीले कार्ड
विश्व कप के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी टीम को फेयर प्ले के अंकों के आधार पर बाहर होना पड़ा। सेनेगल और जापान की अंतिम मुकाबलों में हार के बाद दोनों टीमों का गोल अंतर और अंक समान निकले। इसके बाद फेयर प्ले अंकों की बारी आई। जिसमें रेड कार्ड, पीले कार्ड और फाउलों की संख्या देखी गई। यहां जापान सेनेगल पर इक्कीस छूटा और इस आधार पर उसे अंतिम 16 में जगह मिल गई। जापान के फेयर प्ले अंकों की -4 संख्या सेनेगल के -6 से कम निकली।
राड्रिगुएज के जाने के बाद हीरो बने मीना
पिछले विश्व कप में छह गोल कर सुर्खियां लूटने वाले हामेस राड्रिगुएज को पहले हॉफ में ही चोट के चलते बाहर होना पड़ा। जिसके चलते कोलंबिया की मुश्किलें बढ़ गईं, लेकिन येरी मीना ने कॉर्नर पर अपने खूबसूरत हेडर से गोल कर कोलंबिया को विश्व कप से बाहर होने से बचा लिया।
बुरी शुरुआत के बाद टॉपर बना कोलंबिया
कोलंबिया की इस विश्व कप में शुरुआत भयावह हुई थी, जिस जापानी टीम को उसने पिछले विश्व कप में 4-1 से बुरी तरह रौंदा था उसने इस विश्व कप के पहले ही मैच में उसे 2-1 से परास्त कर दिया। कारण था खेल के तीसरे मिनट में ही कार्लोस सांचेज को रेड कार्ड दिखाया जाना। 10 खिलाडियों से खेल रही कोलंबिया को हार का मुंह देखना पड़ा था।