जबरदस्त मिडफिल्ड: पूरी टीम मैदान पर योगदान देने को आतुर है। इसका उदाहरण आठ खिलाड़ियों का टीम के लिए 10 गोल करना है। यह किसी स्टार खिलाड़ी की टीम नहीं बल्कि खिलाड़ियों ने मिलकर टीम को स्टार सी चमक दिलाई है। आक्रमण या डिफेंस टीम की मिडफिल्ड की जितनी तारीफ की जाए कम।
बेहतरीन गोलकीपर: दो पेनल्टी शूटआउट में जीत के साथ क्रोएशियाई टीम के गोलकीपर सुबासिच हीरो बन गए हैं। पहले डेनमार्क फिर रूस दोनों को ही क्रोएशिया ने अपने बेहतरीन गोलकीपर के बूते ही मात दी। फ्रांस के खिलफ वह सभी की निगाहों में रहेंगे।
करिश्माई कप्तान: लुका मॉड्रिक अपनी टीम के लिए आदर्श बनकर उभरे हैं। पूरे विश्व कप के सबसे एक्टिव मिडफिल्डर मॉड्रिक की न सिर्फ कहानी प्रेरणादायी है बल्कि वह अपने खेल से भी साथी खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन कर रहे होंगे। मॉड्रिक ने पांच मैचों में दो गोल किए हैं। फ्रांस के खिलाफ क्रोएशिया को उनसे करिश्माई प्रदर्शन की उम्मीद होगी।
डैनिएल सुबासिच 33, इवान स्त्रिनिच 30, दोनों सेंट्रल-डिफेंडर्स 29, इवान रैकिटिच 30, इवान पेरिसिच 29, लूका मॉड्रिच 32 और मारियो मंजुकिच भी इसी उम्र के हैं। टीम की पूरी रीढ़ जानती है कि विश्व के सबसे बड़े स्टेज पर अपनी छाप छोड़ने का यह उनके पास आखिरी मौका है। साथ-साथ इनका अनुभव और जोश का कॉकटेल ही तो क्रोएशिया को दूसकी टीम से अलग बनाता है।