सुनामी के बवंडर से बचकर साइकिलिस्ट बनने वाली अंडमान निकोबार की डिबोरा एक और करिश्मे के लिए तैयार हैं। उनकी अगुवाई में भारत ने शुक्रवार को इंदिरा गांधी वेलड्रोम में टीम परस्यूट के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया। लेकिन पंजाब की जशनदीप कौर दुर्भाग्यशाली रहीं। वह दो किलोमीटर व्यक्तिगत परस्यूट में कांस्य पदक से चूक गईं। उन्हें कजाखस्तान की येकतेरीना ने परास्त किया।
पदक खोने की भड़ास जशनदीप ने भारतीय रायडरों को दी जा रही कोचिंग पर सवालिया निशान लगाकर निकाल दी। उन्होंने साफ कहा कि भारतीय कोच आधुनिक नहीं हैं वे सिर्फ स्टॉप वॉच से समय देखने के अलावा और कुछ नहीं करते हैं।
साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अधिकारियों को जब पता लगा कि जशनदीप इस तरह बोल रही हैं तो वह उन्हें वहां से ले गए। लेकिन मलेशिया टीम के ऑस्ट्रेलियाई कोच जॉन बीसल ने जशनदीप के आरोपों को सही साबित कर दिया।
बीसल ने अमर उजाला से कहा कि भारतीय रायडरों में जबरदस्त टैलेंट है। डिबोरा इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। सिर्फ उन्हें अच्छी कोचिंग और दिशा देने की जरूरत है। बीसल ने साफ कहा कि दुनिया की हर फेडरेशन में राजनीति व्याप्त है। लेकिन इसी में से खेल को आगे निकालना है।
इस दौरान डिबोरा, विद्यालक्ष्मी, गीतूरात व जशनदीप की टीम ने जोरदार फर्राटा भरकर अपने को कांस्य पदक की दौड़ में शामिल कर लिया है। जहां उनका मुकाबला कजाखस्तान से होगा।