ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 शुरू होने से पहले भारत को बड़ा झटका लगा है। भारतीय पैरा तैराक तेजस नंदकुमार कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। आयोजकों ने अंतरराष्ट्रीय क्लासिफिकेशन नियमों का हवाला देते हुए उन्हें प्रतियोगिता के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। तेजस नंदकुमार का नाम हाल ही में भारत सरकार द्वारा घोषित कॉमनवेल्थ गेम्स दल में शामिल किया गया था। उन्हें ग्लासगो में पुरुषों की 50 मीटर फ्रीस्टाइल एस7 स्पर्धा में हिस्सा लेना था और शुरुआत में उनकी एंट्री भी स्वीकार कर ली गई थी।
आयोजकों ने क्यों किया अयोग्य घोषित?
- ग्लासगो 2026 आयोजन समिति ने नौ जुलाई को भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) को भेजे पत्र में बताया कि अंतरराष्ट्रीय महासंघ की वैलिडेशन प्रक्रिया के बाद तेजस नंदकुमार प्रतियोगिता के लिए पात्र नहीं पाए गए।
- आयोजकों के अनुसार, पैरा स्विमिंग में भाग लेने के लिए खिलाड़ी का अंतरराष्ट्रीय क्लासिफिकेशन 'कन्फर्म्ड' होना चाहिए या फिर 2027 या उसके बाद की तय समीक्षा के साथ मान्य होना चाहिए।
- जबकि तेजस नंदकुमार की क्लास स्टेटस 'आर-2025' है, जो 23 जून 2026 की अंतिम एंट्री तिथि तक निर्धारित पात्रता मानकों को पूरा नहीं करती।
- इसी कारण उनकी एंट्री रद्द कर दी गई।
एस7 क्लासिफिकेशन क्या है?
- एस7 श्रेणी उन पैरा तैराकों के लिए होती है, जिनके शरीर के ऊपरी हिस्से (हाथ और धड़) का उपयोग सामान्य रूप से होता है, लेकिन पैरों की कार्यक्षमता सीमित होती है।
- इस श्रेणी में वे खिलाड़ी भी शामिल होते हैं जिनके दोनों पैरों का कुछ हिस्सा नहीं होता या चारों अंगों की गतिविधि सीमित होती है।
- तेजस नंदकुमार जन्मजात शारीरिक स्थिति के कारण पैरों से संबंधित दिव्यांगता के साथ खेलते हैं।
पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कर चुके हैं प्रतिनिधित्व
20 वर्षीय तेजस नंदकुमार इससे पहले 2023 पैरा एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। हालांकि इस बार क्लासिफिकेशन नियमों के कारण उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स में उतरने का मौका नहीं मिल सकेगा।
क्या होता है क्लासिफिकेशन?
- पैरा खेलों में क्लासिफिकेशन एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है, जिसके माध्यम से खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता का आकलन कर उन्हें उपयुक्त वर्ग में रखा जाता है।
- इसका उद्देश्य समान क्षमता वाले खिलाड़ियों के बीच निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है।
- यह प्रक्रिया मेडिकल और तकनीकी विशेषज्ञों की समिति द्वारा की जाती है।
- कई मामलों में खिलाड़ियों का क्लासिफिकेशन स्थायी नहीं होता और समय-समय पर उनकी दोबारा समीक्षा की जाती है, विशेषकर तब जब उनकी शारीरिक स्थिति में बदलाव की संभावना हो।