भारतीय पहलवानों ने 20वें राष्ट्रमंडल खेलों में मंगलवार को देश को 4 में से 3 स्वर्ण पदक दिला दिए हैं। स्वर्णिम सफलता की शुरुआत अमित कुमार ने कराई, जिन्होंने फ्रीस्टाइल कुश्ती में 57 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।
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अमित के अलावा महिला वर्ग में विनेश ने भी भारत को कुश्ती में सफलता दिलाई। आज की स्वर्णिम सफलता में सभी को दो बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार से भी बड़ी आस थी जिन्होंने अपनी ख्याति के अनुरूप प्रदर्शन करते हुए देश को एक और गोल्ड दिलाया। खास बात यह रही कि सुशील ने पाकिस्तानी पहलवान को हराकर गोल्ड जीता।
कुश्ती में सुशील, अमित और विनेश कुमारी के स्वर्ण पदक जीतने के बाद द्रोणाचार्य अवॉर्डी महासिंह राव के शिष्य राजीव तोमर पर सभी निगाहें टिकी हुई थी कि वह 125 किग्रा के सुपर हैवीवेट वर्ग में भारत को चौथी स्वर्णिम कामयाबी दिला पाते हैं या नहीं। लेकिन यूपी के बागपत के तोमर ने गोल्ड के लिए भरपूर कोशिश की लेकिन कनाडा के पहलवान कोरी जारविस ने तोमर को दांव लगाने का कोई मौका नहीं दिया और 3-0 से यह मुकाबला जीतकर स्वर्ण अपने नाम कर लिया।
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कुश्ती में पहला गोल्ड दिलाया अमित ने
पिछले साल बुडापेस्ट में वर्ल्ड चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता अमित कुमार ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में जबर्दस्त प्रदर्शन करते हुए देश को कुश्ती में पहला स्वर्ण और कुल आठवां गोल्ड दिला दिया।
अमित ने फाइनल में नाइजीरिया के एबिकवेमिनोमो वेल्सन को कुश्ती के 57 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में 6-2 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। हरियाणा के सोनीपत जिले के नाहरी गांव के 20 वर्षीय अमित ने सेमीफाइनल में पाकिस्तान के अजहर हुसैन को 4-0 से पस्त कर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई थी।
फाइनल में अमित ने नाइजीरियाई पहलवान को धो कर राष्ट्रमंडल खेलों में अपना पहला स्वर्ण पदक जीत लिया।
द्रोणाचार्य अवार्डी महाबली सतपाल के शिष्य अमित ने स्टेडियम में अपने गुरु की मौजूदगी में शानदार शुरूआत करते हुए पहले ही राउंड में चार अंक बटोर डाले। हालांकि दूसरे ही राउंड में विपक्षी पहलवान ने अमित को कंधों पर उठाकर मैट पर पटका और 2 अंक हासिल किए।
लेकिन अमित ने फिर एक शानदार दांव लगाकर 2 अंक बटोर लिए और वेल्सन को शेष समय में कोई दांव लगाने से दूर रखा। मुकाबला खत्म होते ही अमित ने अपने दोनों हाथ हवा में उठा दिए और फिर तिरंगा लेकर मैट का चक्कर लगाया।
विनेश ने महिला वर्ग में जीता गोल्ड
विनेश ने भी ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में देश को स्वर्ण पदक दिलाया। उन्होंने महिला कुश्ती प्रतियोगिता के 48 किग्रा भार वर्ग के स्वर्ण पदक मुकाबले में इंग्लैंड की याना रैटिगन को रोमांचक मुकाबले में 11-8 से हराया।
खिताबी जंग का पहला दौर कांटे का रहा जिसमें विनेश विपक्षी खिलाड़ी से 6-4 से आगे रहीं। इसके बाद दूसरे दौर में विनेश ने 5-4 का स्कोर किया। इस तरह से उन्होंने भारत को गेम्स में 9वां गोल्ड दिलवाया।
इससे पहले भिवानी की इस छोरी ने कनाडा की जासमिन मियान को जोरदार पटखनी देकर फाइनल में प्रवेश किया था। विनेश ने क्वार्टर फाइनल में नाइजीरिया की रोजमैरी वेके को 7-1 से पराजित किया।
ग्लासगो में स्वर्ण पदक जीतने के बाद बलाली गांव की निगाहें अब विनेश की चचेरी बबीता फौगाट पर टिक गई हैं। भारत की अनुभवी पहलवान बबीता का 55 किग्रा भार वर्ग में मुकाबला 31 जुलाई को है। विनेश की तरह बबीता की जीत पर भी परिजन आशान्वित हैं।
पाक चुनौती को ध्वस्त कर जीता सोना
भारतीय कुश्ती का सबसे बड़ा नाम सुशील कुमार ने भी अपनी ख्याति के अनुरूप प्रदर्शन किया और देश को एक और गोल्ड दिलाया। 2010 में दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण विजेता सुशील ने इस बार नए वजन वर्ग 74 किग्रा में अपनी चुनौती पेश की थी।
फाइनल में उन्होंने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के कमर अब्बास को 8-0 हराया।
सुशील ने आज बेहद शानदार खेल का प्रदर्शन किया। क्वार्टर फाइनल में
सुशील ने एकतरफा मुकाबले में श्रीलंका के पहलवान को 10-0 से हराया। इससे
पहले उन्होंने प्री-क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के लारेंस को 4-0 से
हराया था। इसके बाद उन्होंने सेमीफाइनल में नाइजीरिया के पहलवान को
8-4 के अंतर से हराया।
सुशील देश को दुनिया के बड़े खेल आयोजनों में देश को ढेरों पदक दिला चुके हैं। दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक के अलावा सुशील ने लंदन ओलंपिक (2012) में रजत और वर्ल्ड चैंपियनशिप के स्वर्ण पदक जीता था। सेमीफाइनल में सुशील ने नाइजीरिया के मेल्विन बीबो को 8-4 से हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई थी।
गोल्ड से चूके राजीव तोमर
कुश्ती में सुशील कुमार, अमित कुमार और विनेश कुमारी के स्वर्ण पदक जीतने के बाद द्रोणाचार्य अवॉर्डी महासिंह राव के शिष्य राजीव तोमर पर सभी निगाहें टिकी हुई थी कि वह 125 किग्रा. के सुपर हैवीवेट वर्ग में भारत को चौथी स्वर्णिम कामयाबी दिला पाते हैं या नहीं। उत्तर प्रदेश के बागपत के तोमर ने भरपूर कोशिश की लेकिन कनाडा के पहलवान कोरी जारविस ने तोमर को दांव लगाने का कोई मौका नहीं दिया और 3-0 से यह मुकाबला जीतकर स्वर्ण अपने नाम कर लिया।
इसके बावजूद भारत की कुश्ती के पहले दिन जबरदस्त शुरुआती हुई और उसने तीन स्वर्ण और एक रजत पदक जीत डाला। तोमर ने नाइजीरिया के सिनिवी बाल्टिक को क्वार्टर फाइनल में 12-2 से पीटा और फिर सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के कार्नी को 13-1 से धो दिया। तोमर ने कार्नी की इस कदर धुनाई की कि पहले राउंड में भारतीय पहलवान ने पांच अंक और दूसरे राउंड में आठ अंक बटोर डाले।
भारत ने 4 साल पहले दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में कुल 10 स्वर्ण पदक जीते थे जिनमें 3 फ्रीस्टाइल पहलवानों ने, 4 ग्रीको रोमन पहलवानों और 3 महिला पहलवानों ने जीते थे। मगर इस बार ग्रीको रोमन को राष्ट्रमंडल कुश्ती से बाहर किए जाने के बाद अब सारा दारोमदार फ्रीस्टाइल पहलवानों पर आ गया है।
हरप्रीत ने 25 मीटर रैपिड पिस्टल में मारी बाजी
भारत के हरप्रीत सिंह ने 20वें राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को पुरुषों की 25 मीटर रैपिड पिस्टल स्पर्धा में रजत पदक दिलाया।
हरप्रीत ने यह कारनामा उस समय किया जब इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक के प्रबल दावेदार माने जा रहे ओलंपिक रजत पदक विजेता विजय कुमार फाइनल के लिए क्वालीफाई भी नहीं कर सके। 2010 में दिल्ली में विजय ने इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था।
पिछली बार के चैंपियन विजय कुमार के पदक की होड़ से बाहर हो जाना भारतीय खेमे के लिए एक बड़ा झटका था। ऐसे में अब सभी की निगाहें हरप्रीत पर लगी थी।
अपना दूसरा राष्ट्रमंडल खेल में हिस्सा ले रहे हरियाणा के शूटर हरप्रीत ने उम्मीदों पर खरा उतरते हुए संघर्षपूर्ण मुकाबले के बाद आखिरकार रजत पदक भारत की झोली में डाल दिया। अपने इस बेहतरीन प्रदर्शन से हरप्रीत ने दिखा दिया की वह इन खेलों में चमक बिखेरने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
इस पदक के साथ हरप्रीत ने गेम्स में अपने शानदार प्रदर्शन को ग्लासगो में भी कायम रखा। हरप्रीत ने दिल्ली गेम्स में 2 गोल्ड जीते थे। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक ऑस्ट्रेलिया के डेविड जे चैपमैन ने 23 निशाने लगाकर जीता। वहीं हरप्रीत ने 21 निशाने लगाए। कनाडा के मेटोडी इदोरोव ने शॉट-ऑफ मुकाबले के बाद कांस्य पदक हासिल किया।
2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ खेलों में पुरुषों की ट्रैप सिंगल्स स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाले भारतीय शूटर मानवजीत सिंह संधू अपने प्रदर्शन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए ग्लासगो पहुंचे थे, लेकिन वह बदकिस्मत रहे और सिर्फ एक खराब शॉट से अपने पदक का रंग बदलने से चूक गए।
इस तरह मानवजीत को इस बार भी कांस्य पदक के साथ ही संतोष करना पड़ा। इसी स्पर्धा में एक अन्य भारतीय निशानेबाज मनशेर सिंह पदक राउंड में पहुंचने से दूर रह गए।
कांस्य पदक के लिए हुए मुकाबले में मानवजीत ने ऑस्ट्रेलिया के माइकल डायमंड को शूट ऑफ में शिकस्त दी। पंजाब के अमृतसर के रहने वाले संधू और डायमंड दोनों एक समय 13 शॉट तक 10-10 के स्कोर की बराबरी पर थे। संधू 14वें शॉट में चूक गए जबकि डायमंड ने 14वें शॉट में निशाना साधते हुए बढ़त बना ली, लेकिन आखिरी शॉट पर डायमंड निर्णायक शॉट लगाने से चूक गए।
इस बेहतरीन मौके को संधू ने नहीं गंवाया और आखिरी निशाना साधकर स्कोर बराबर कर लिया। अब पदक के लिए मुकाबला शूट-ऑफ में पहुंचा जहां संधू ने निशाना साध लिया लेकिन डायमंड चूक गए और कांस्य पदक भारत की झोली में आ गया। निशानेबाजी में भारत का यह कुल 14वां और इन खेलों में कुल 28वां पदक है। भारत निशानेबाजी में अब तक चार स्वर्ण, आठ रजत और दो कांस्य पदक जीत चुका है।