जूडो में तीन तरह से स्कोरिंग होती है। इसे इपपोन, वजा-आरी और यूको कहते हैं। इपपोन तब होता है, जब खिलाड़ी सामने वाले खिलाड़ी को थ्रो करता है और उसे उठने नहीं देता। इपपोन होने पर एक फुल पॉइंट दिया जाता है और खिलाड़ी जीत जाता है। सारा ने सेमीफाइनल में इसी तरह से जीत हासिल की।
इससे पहले तूलिका ने भी वजा-आरी से पॉइंट हासिल कर लिया था। अगर थ्रो कम ताकत से किया गया, तो उसे वजा-आरी कहते हैं। इसमें आधा पॉइंट दिया जाता है। किसी खिलाड़ी के दो बार वजा-आरी करने पर एक फुल पॉइंट मिलता है और वह खिलाड़ी विजेता बनता है। हालांकि, तूलिका जब तक दूसरी बार वजा-आरी या इपपोन की कोशिश करतीं, उससे पहले सारा ने इपपोन करके मैच जीत लिया। सारा ने आखिरी मिनट में इपपोन से मैच जीता।
फाइनल के बाद सारा और तूलिका
तूलिका ने पहले मैच में मॉरिशस की ट्रैसी डुरहन को हराया था। इसके बाद दूसरे मैच में तूलिका ने न्यूजीलैंड की सिडनी एंड्यूस को हराया। तीसरे मैच यानी फाइनल में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हार के बाद तूलिका काफी निराश दिखीं।
यह बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का जूडो में दूसरा रजत और कुल तीसरा पदक है। इससे पहले सुशीला देवी ने रजत और विजय यादव ने कांस्य जीता था। वहीं, कुल मिलाकर बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का यह 16वां पदक है।
बुधवार के दिन का यह भारत का तीसरा पदक रहा। इससे पहले लवप्रीत सिंह (वेटलिफ्टिंग), सौरव घोषाल (स्क्वैश) ने पदक जीते हैं। वहीं, तूलिका का पदक भारत का ओवरऑल राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो में 11वां पदक है। भारत ने इस दौरान पांच रजत और छह कांस्य जीते हैं।