आईसीसी महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप 2017 के फ़ाइनल मुक़ाबले तक पहुंची भारतीय टीम की कप्तान मिताली राज का सपना क्रिकेट नहीं कुछ और था। मिताली ने किस तरह क्रिकेट की दुनिया में क़दम रखा और किन मुश्किलों को झेलते हुए आज एक सफ़ल कप्तान हैं, इन सब बातों पर बीबीसी से बात की मिताली के पिता दोराय राज और मां लीला राज ने।
क्या बचपन से मिताली का रुझान क्रिकेट की तरफ था।
मां: नहीं. उसका इंटरेस्ट डांस पर था. स्पोर्ट्स, क्रिकेट में बायचांस वह आ गईं।
महिला क्रिकेटर, कराटे चैंपियन और फ़्लाइट लेफ़्टिनेंट भी।
'स्मृति मंधाना महिला क्रिकेट की सचिन तेंदुलकर हैं'।
इतिहास रचने से एक कदम दूर महिला टीम इंडिया।
जब उन्होंने कहा कि वह क्रिकेट खेलना चाहती हैं तो आपका रिएक्शन क्या था।
पिता: यह उनकी नहीं मेरी कोशिश थी। वह सुबह काफ़ी देर से जागती थीं और आलसी भी थीं। उसे एक्टिव बनाने के लिए मैं बेटे के साथ उसे भी ग्राउंड पर ले जाने लगा। वहां कुछ समय बिताने के बाद मैं उन्हें प्लास्टिक बॉल और टेनिस बॉल फेंकने के लिए कहता। उस समय वहां कोच ज्योति प्रसाद थे। वो देखते थे कि लड़की बढ़िया गेंद फेंकती है।
ज्योति प्रसाद ने उन्हें एक हफ़्ते के लिए ट्रायल पर रखा और रोज 10 मिनट बैटिंग के लिए देते थे। एक दिन उन्होंने कहा कि इस लड़की में टैलेंट है। आप इसे प्रॉपर क्रिकेट कैंप में भेजिए. मैंने पूछा लड़कियों के लिए प्रॉपर कैंप कहां है देश में। उसके स्कूल में संपत कुमार लड़कियों को क्रिकेट की कोचिंग देते थे। हमने उनसे बात की और फिर जो कुछ हुआ वो इतिहास है। मिताली बचपन में काफ़ी आलसी थीं, क्या वो उससे बाहर आ चुकी हैं या उन्हें अब भी कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।
मां: मुझे लगता है वो अभी भी आलसी हैं. क्रिकेट ने उन्हें बदला है. पहले उनकी सोने की आदत से परेशान होकर हमने उन्हें क्रिकेट खेलने के लिए भेजा. लेकिन उनका जो आलसीपन था वही उसका प्लस प्वाइंट रहा है. वह अपनी नींद से समझौता नहीं कर सकती हैं। उन्हें आठ घंटे की नींद हर हाल में चाहिए। मिताली को हाल ही में मैच के बाद किताब पढ़ते देखा गया है। उनकी कोई और हॉबी है।
पिता: मुझे लगता है कि किताबों के अलावा म्यूज़िक उन्हें पसंद है. बीच में जब दो महीने का रेस्ट था, कोई मैच कोई सीरीज़ नहीं थी तो वह मेरे पास आईं और कहा कि उन्हें गिटार सीखना है। मैंने उनसे पूछा कि वह अब कैसे करेंगी? तो उन्होंने कहा कि बस आप गिटार टीचर ढूंढ़ो।
मैं सीख लूंगी। उन्होंने महीने सीरियस होकर गिटार सीखा। जब क्रिकेट शुरू हो गया तो उन्होंने गिटार हो या कुछ और सब कुछ साइड कर दिया। उसके पहले क़रीब तीन साल पहले उन्होंने अपनी मम्मी से कहा कि उसे पेंटिंग सीखनी है। उसने तीन महीने तक पेंटिंग बनाना सीखा और कुछ अच्छी पेंटिंग उसकी हैं। हम उसकी हर चाहत पूरी करने की कोशिश करते हैं। उसके पास क़रीब 400-500 किताबें हैं. इनमें से ज़्यादातर आत्मकथाएं हैं।