कभी टेनिस कोर्ट पर अपने खेल से पूरी दुनिया को दीवाना बनाने वाले जर्मनी के बोरिस बेकर अब अध्यापक बन गए हैं। ऑक्सफोर्डशायर स्थित एचएमपी हंटरकांब जेल में उन्हें यही कार्य सौंपा गया है। 23 करोड़ 70 लाख रुपये संपत्ति और धरोहरों को छुपाते हुए खुद को दिवालिया घोषित करने के मामले में बेकर को इसी साल अप्रैल माह में ढाई साल की सजा सुनाई गई है। तीन बार के विंबलडन विजेता जेल की पाठशाला में फिजिकल एजुकेशन (शारीरिक शिक्षा) के अलावा एक्सरसाइज और डाइट के बारे में साथी कैदियों को पढ़ाएंगे।
अध्यापक का काम देने पर साथी कैदियों ने किया विरोध
हालांकि बेकर को जेल में आए हुए अभी कुछ ही दिन हुए हैं और उन्हें इतना आरामदायक काम देने पर साथी कैदियों ने विरोध करना शुरु कर दिया है। कई कैदियों के रिश्तेदारों ने बेकर को दिए गए काम पर विरोध जताते हुए गवर्नर को पत्र भी लिखा है। जेल के एक अधिकारी का कहना है कि बेकर कोई आरामदायक काम नहीं दिया गया है। उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार काम दिया गया है। वह जेल में ज्यादातर विदेशी कैदियों को पढ़ाएंगे।
शिष्य जोकोविच को जीतते देख भावुक हो गए बेकर
बेकर को जेल में सी कैटेगरी के कैदी के तौर पर रखा गया है। ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बेकर को जेल में सलाखों के पीछे विंबलडन का फाइनल देखने की भी अनुमति दी गई। वह यह फाइनल इस वजह से भी देखना चाहते थे, क्यों कि इसमें उनके पूर्व शिष्य नोवाक जोकोविच खेलने जा रहे थे। जेल में मौजूद लोग बताते हैं कि फाइनल देखने के दौरान जोकोविच को जीतते देखकर बेकर अपनी भावनाओं को काबू में नहीं रख पाए। वह जोकोविच के सातवें खिताब जीतने पर बेहद खुश थे। बेकर ने जोकोविच को 2014 से 2016 के बीच कोचिंग दी थी।
साल के अंत तक बाहर आने की उम्मीद
पूर्व विश्व नंबर एक बेकर को उम्मीद है कि इस साल नवंबर माह तक उन्हें वापस जर्मनी निर्वासित कर दिया जाएगा, यहां ब्रिटेन के अपेक्षाकृत आसान कानून के चलते उन्हें जल्द रिहा किया जा सकता है। ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही है कि ढाई साल की सजा के बावजूद वह साल के अंत तक जेल से बाहर होंगे।