वह बताती हैं, 'एशिया में बैडमिंटन में अब केवल चीन ही चुनौती नहीं है। अब चीनी ताइपे, दक्षिण कोरियाई और मलयेशियाई खिलाड़ी बहुत तेजी से उबर रही हैं। बैडमिंटन का स्तर एशिया में और उंचा उठ रहा है। ऐसे में एशिया में पदक जीतने के लिए बतौर खिलाड़ी और ज्यादा कड़ी चुनौती है। मेरा मानना है एशियाई खेलों में पदक जीतने के लिए अपनी फिटनेस पर बहुत मेहनत करनी होगी। मैं और सिंधू एक ही गुरु गोपी की शिष्या हैं।
उन्होंने बताया, 'हमारे गुरु ने अंतर्राष्ट्रीय पर कामयाबी का बस यही मंत्र दिया है कि नतीजे की परवाह किए बिना कोर्ट पर शिद्दत से खेले। मैं औैर सिंधू बहुत मेहनती हैं। हम सिर्फ और सिर्फ बैडमिंटन की बाबत ही सोचती हैं हम दोनों इसलिए एक बार कोर्ट पर उतर कर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश करती हैं। हमने अब तक जो भी हासिल किया अपनी इस मेहनत की बदौलत हासिल किया है। राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में मेरा सिंधू के खिलाफ महिला सिंगल्स फाइनल खासा रोचक रहा। मैं अहम अंकों पर ज्यादा संयत होकर खेली और इसीलिए मैं सुनहरा तमगा जीत पाईं।'
saina nehwal and pv sindhu
साइना कहती हैं, 'हमें ओलंपिक मेडल न जीत पाने की कसक का अहसास गोपी सर से बातचीत करने पर ही हुआ। जब मैंने लंदन ओलंपिक में 2012 में ब्रॉन्ज मेडल जीता और तिरंगा लहराया गया तो वहां कोर्ट के एक कोने में खड़े गोपी सर की आंखों से खुशी की आंसू बह निकले थे।'
'यह देखकर मैं भी भावुक हो गई थी। ओलंपिक मेडल जीतने के लिए मैनें सात आठ घंटे रोज प्रैक्टिस की। गोपी सर की मेहनत का तो कोई सानी ही नहीं है वह 17 से 18 घंटे बैडमिंटन कोर्ट पर सिर्फ और सिर्फ बैडमिंटन खिलाड़ियों को तराशने पर लगाते हैं। मैं बैडमिंटन के अलावा कुछ ओर सोचती नहीं हूं । जब भी फुर्सत मिलती है ता बॉलीवुड मूवी देखना पसंद करती हूं।'