36 साल बाद भारत को वर्ल्ड चैंपियनशिप के पुरुष एकल में पदक दिलाने वाले बी साईं प्रणीत ने इतिहास रच दिया है। वे 1983 के बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत को पदक दिलाने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले 83 के वर्ल्ड चैंपियनशिप में दिग्गज प्रकाश पादुकोण ने कांस्य पदक अपने नाम किया था। वहीं इस बार 27 वर्षीय प्रणीत ने ये उपलब्धि अपने नाम की।
प्रणीत ने कहा 'महान प्रकाश पादुकोण के साथ अपना नाम देखने मेरे लिए गर्व की बात है। टूर्नामेंट के शुरू होने से पहले मैंने खुद से वादा किया था कि सेमीफाइनल में पहुंचना है। हालांकि मैं वहां केंतो मोमोता से हार गया। लेकिन इसके बावजूद दुनिया के सामने पोडियम पर खड़े होकर मेडल लेना अद्भुत था।'
प्रणीत ने क्वार्टरफाइनल में एशियन गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट जोनाथन क्रिस्टी को हराया था।
कांस्य पदक जीतने के बाद प्रणीत ने अपने गुरु पुलेला गोपीचंद के बारे में कहा कि 'सर हर वक्त मेरे साथ थे। जब मैंने मेडल जीता तब उन्होंने मुझे गले लगाया और मेरे साथ फोटो खिंचाई और बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस पल का आनंद लो। सर ने मुझे और मेहनत करने को कहा है। '
भारत को इस बार के वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो पदक मिले। पुरुषों के एकल में प्रणीत ने जहां कांस्य पदक जीता वहीं महिलाओं की एकल स्पर्धा में पीवी सिंधु ने गोल्ड मेडल पर कब्ज़ा जमाया। बता दें कि सिंधु और प्रणीत दोनों ही गोपीचंद की अकादमी में ट्रेनिंग लेते हैं और उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।