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पूर्व दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ी ने की सिंधु की जमकर तारीफ, बोले- उनके खेल में कोई कमी नहीं

Tue, 07 Aug 2018 09:41 PM IST
भाषा, नई दिल्ली
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पीवी सिंधु
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पीवी सिंधु को पिछले दो साल में कई बड़ी प्रतियोगिताओं के फाइनल में हार का सामना करना पड़ा लेकिन पूर्व दिग्गज खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण ने कहा कि भारत की नंबर एक महिला बैडमिंटन खिलाड़ी के खेल में कोई कमी नहीं है और उन्हें अगले साल स्वर्ण पदक को लक्ष्य बनाना चाहिए।

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सिंधु को हाल में लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियनिशप के फाइनल में हार का सामना करना पड़ा। बड़े टूर्नामेंट के फाइनल में 2016 से यह 23 साल की सिंधु की आठवीं हार है। इससे पहले वह रियो ओलंपिक, हांगकांग ओपन (2017, 2018), सुपर सीरीज फाइनल (2017), इंडिया ओपन (2018) और थाईलैंड ओपन (2018) के फाइनल में हार चुकी हैं।

ओलंपिक रजत पदक विजेता सिंधु को रविवार को नानजिंग में विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में स्पेन की ओलंपिक चैंपियन कैरोलिना मारिन के खिलाफ 19-21, 10-21 की हार के साथ रजत पदक से संतोष करना पड़ा। मारिन ने रियो ओलंपिक 2016 के फाइनल में भी सिंधु को हराया था।
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सिंधू के प्रदर्शन के बारे में पूछने पर दुनिया के पूर्व नंबर एक खिलाड़ी पादुकोण ने यहां जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप के इतर संवाददाताओं से कहा, 'मुझे लगता है कि वह अच्छा खेली। उसे श्रेय दिया जाना चाहिए कि वह लगातार दूसरे साल फाइनल में पहुंची। शीर्ष स्तर पर प्रतिस्पर्धा काफी कड़ी है। यह आसान नहीं है। उसे अगले साल स्वर्ण पदक (विश्व चैंपियनशिप में) को लक्ष्य बनाना चाहिए।' 

उन्होंने कहा, 'कुल मिलाकर यह अच्छा प्रदर्शन था। फाइनल के सफर के दौरान उसने जापान की दो खिलाड़ियों को हराया जिनसे आम तौर पर वह हार जाती है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वह फाइनल नहीं जीत पाई लेकिन कुल मिलाकर उसने अच्छा प्रदर्शन किया।' 

सिंधु की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा, 'वह निश्चित तौर पर महानतम खिलाड़ियों में से एक है, इसमें कोई शक नहीं है। वह अब भी युवा है और उसे लंबा रास्ता तय करना है। वह सिर्फ 23 साल की है और संन्यास लेने तक वह काफी कुछ हासिल कर चुकी होगी।' 

पीवी सिंधु - फोटो : file photo
इंडोनेशिया के कोच मुलोयो हंडोयो के भारतीय टीम का साथ छोड़ने के बारे में पूछने पर पादुकोण ने कहा, 'मेरे लिए इस पर प्रतिक्रिया देना मुश्किल है। गोपी (मुख्य राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद) अच्छा काम कर रहा है। उसे संभवत: अपनी सहायता के लिए किसी की जरूरत है क्योंकि काफी सारे अच्छे खिलाड़ी हैं और एक कोच के लिए सभी का ध्यान रख पाना मुश्किल है। हमें उसकी सहायता के लिए किसी को ढूंढना होगा।' 

अन्य देशों से भारत की तुलना पर उन्होंने कहा, 'हम पहले ही काफी आगे बढ़ चुके हैं। हम बड़ी प्रतियोगिता के फाइनल में नहीं जीत रहे इसका मतलब यह नहीं कि हमारा स्तर कम है। हमारे अधिकांश शीर्ष खिलाड़ियों ने किसी ना किसी टूर्नामेंट में विश्व के शीर्ष खिलाड़ियों को हराया है। ऐसा नहीं है कि वे अजेय हैं, उन्हें हराया जा सकता है। मुझे लगता है कि हमारे खिलाड़ियों को सिर्फ महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में थोड़ा बेहतर करने की जरूरत है।'

उन्होंने कहा, 'पिछले पांच साल में हम दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है। हम चीन, इंडोनेशिया को अच्छी टक्कर दे रहे हैं। एकल वर्ग में हमारे पास बेहतर प्रतिभा है। युगल में कुछ जोड़ियां अच्छा कर रही हैं। दो या तीन साल पहले की तुलना में यह सुधार है। इसमें समय लगेगा। यह धीमी प्रक्रिया है।' 

इस साल व्यस्त कार्यक्रम तथा एशियाई खेल और विश्व चैंपियनशिप के जल्दी जल्दी होने पर उन्होंने कहा, 'यह आसान नहीं होगा। बैडमिंटन खेलने वाले शीर्ष देश एशियाई हैं। इन खेलों के लिए वे काफी कड़ी तैयारी कर रहे हैं। किसी भी खिलाड़ी के लिए इतनी जल्दी दो बड़ी प्रतियोगिताओं के दौरान शीर्ष खेल दिखाना आसान नहीं होता। यह मुश्किल होगा लेकिन असंभव नहीं है। यह इस पर निर्भर करेगा कि उस हफ्ते के दौरान वे कैसे अपने खेल के शीर्ष पर पहुंचते हैं।' 
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पीवी सिंधु - फोटो : file photo
साइना नेहवाल पिछले कुछ समय से चोटों पर परेशान रही हैं और उन्होंने हाल में वापसी की जिस पर पादुकोण ने कहा, 'अच्छा है कि वह वापसी कर रही है। उसे अपने प्रदर्शन में निरंतरता लानी होगी और अपना कार्यक्रम बेहतर तरीके से तैयार करना होगा।'

अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन के व्यस्त कार्यक्रम पर उन्होंने कहा, 'इस साल थोड़ा ज्यादा रहा। एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और विश्व चैंपियनशिप भी हैं। खिलाड़ियों को टूर्नामेंटों के बीच से चुनना होगा, टेनिस में भी ऐसा ही हो रहा है। प्रायोजक चाहते हैं कि ज्यादा टूर्नामेंट हों। बैडमिंटन के लिए यह अच्छा है कि इतने प्रायोजक आ रहे हैं। सभी को एक साथ बैठकर इस पर काम करने की जरूरत है।'

अच्छी अकादमियों को नहीं छेड़ने की हिदायत देते हुए पादुकोण ने कहा, 'सेंटर आफ एक्सीलेंस हैदराबाद में है जो अच्छा काम रहा है। आपको इसको छेड़ने की जरूरत नहीं है। इसको छेड़ने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए। बाकी जगह केंद्र खोलने पर विचार करना चाहिए।' 

जमीनी स्तर पर सहयोग को अहम बताते हुए उन्होंने कहा, 'शीर्ष खिलाड़ियों का समर्थन करने के लिए काफी प्रायोजक आगे आ जाते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर सहयोग के लिए काफी कम लोग हैं। अच्छी प्रतिभा जमीन स्तर पर है जिसे निखारने की जरूरत है।'

युवावस्था में खिलाड़ियों को मौके देने की जरूरत पर जो देते हुए उन्होंने कहा, 'हमेशा कहा जाता है 'कैच दैम यंग' लेकिन यह सिर्फ एक नारा बन गया था। अब सरकार ने भी आगे बढ़ते हुए खेलो इंडिया की शुरुआत की है जो अच्छी पहल है। मैंने भी अपनी अकादमी को जूनियर स्तर में बदल दिया है। मैच चाहता हूं कि प्रकाश पादुकोण अकादमी भारत की नहीं बल्कि दुनिया की सर्वश्रेष्ठ अकादमी हो।'

उन्होंने कहा, 'हमारा ढांचा अच्छा हो रहा है, निजी स्तर पर ही नहीं बल्कि सरकारी और फाउंडेशन (जैसे ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट, गो स्पोर्ट्स) स्तर पर भी अच्छा सहयोग मिल रहा है जिससे खेल को फायदा होगा।' 

उन्होंने बच्चों के माता-पिता को सलाह देते हुए कहा, 'बच्चों पर दबाव नहीं बनाए। उन्हें खेल का लुत्फ उठाने दें। हर व्यक्ति चैंपियन नहीं बन सकता। इसलिए महत्वपूर्ण है कि उन्हें खेल का आनंद लेने दें।'
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