एशियन गेम्स में जहां एक ओर मैदान पर खिलाड़ी पदक के लिए पसीना बहा रहे हैं, वहीं मेन मीडिया सेंटर (एमएमसी) में खेल को एक अलग ही अंदाज में देखा और महसूस किया जा रहा है। यहां दो बड़े डिस्प्ले बोर्ड पर एशिया के अलग-अलग हिस्सों के कलाकारों द्वारा बनाए गए चित्र लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। इन चित्रों में खेल के रोमांच, भावनाओं और संदेशों को रंगों और रेखाओं के जरिए अभिव्यक्त किया गया है। ये चित्र एक ड्राइंग प्रतियोगिता की विजेता प्रविष्टियां हैं। इनमें कहीं खिलाड़ी पूरी ताकत के साथ अपने खेल का प्रदर्शन करते नजर आते हैं, तो कहीं किसी खेल को लेकर व्यापक संदेश दिया गया है। तस्वीरों और आंकड़ों से भरे एशियन गेम्स के माहौल में यह प्रदर्शनी खेल को देखने का एक बिल्कुल अलग नजरिया पेश करती है।
नेपाली कलाकार की तस्वीर में नीरज की झलक
प्रदर्शनी में नेपाल की एक प्रमुख प्रविष्टि विशेष रूप से आकर्षित करती है। इसमें एक भाला फेंक खिलाड़ी को पूरे जोश के साथ थ्रो करते हुए दिखाया गया है। हवा में तेजी से जाता भाला और खिलाड़ी के सिर पर बंधा बैंडाना भारतीय स्टार जैवलिन थ्रोअर और दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा की याद दिलाता है।
चित्र में नीरज चोपड़ा से समानता इतनी स्पष्ट है कि इसे भारतीय एथलीट के लिए एक कलात्मक श्रद्धांजलि के तौर पर देखा जा सकता है। बिना किसी विस्तृत विवरण के यह चित्र कुछ ही रेखाओं और रंगों के जरिए एक बड़े खेल सितारे की पहचान सामने रख देता है।
क्रिकेट को वैश्विक खेल बनाने का संदेश
नेपाल की एक अन्य प्रविष्टि क्रिकेट पर केंद्रित है। इसमें एक क्रिकेटर और बल्ले के जरिए इस खेल को वैश्विक बनाने का संदेश दिया गया है। यह चित्र इस बात की ओर भी इशारा करता है कि क्रिकेट अब अपने पारंपरिक केंद्रों से आगे निकलकर दुनिया के कई हिस्सों में नए दर्शकों और खिलाड़ियों तक पहुंच रहा है।
हर चित्र में दिखा एशियन गेम्स का 'होनोहोन'
- इन चित्रों को एक साझा पहचान देने का काम एशियन गेम्स का आधिकारिक शुभंकर होनोहोन करता दिखाई देता है। कई चित्रों में यह शुभंकर अलग-अलग रूपों और परिस्थितियों में नजर आता है।
- होनोहोन की प्रेरणा एक पौराणिक जीव से ली गई है, जिसका सिर बाघ का और शरीर कार्प मछली का बताया जाता है। इसे नागोया कैसल से जुड़े संरक्षक देवता से भी जोड़ा गया है। अलग-अलग कलाकारों की अलग शैली के बावजूद शुभंकर की मौजूदगी पूरी प्रदर्शनी को एक सूत्र में बांधती है।
मेडल और स्कोरबोर्ड से आगे खेल की तस्वीर
- प्रदर्शनी की खासियत यह है कि यहां न कोई स्कोरकार्ड है, न आंकड़ों की लंबी सूची और न ही पदकों की चर्चा। इसके बजाय खिलाड़ी, खेल उपकरण, गति, रंग और भावनाएं दिखाई देती हैं।
- कहीं भाला हवा में उड़ता नजर आता है, कहीं क्रिकेट का बल्ला शॉट के लिए तैयार है और कहीं होनोहोन खेल के माहौल का हिस्सा बना हुआ है। ये साधारण प्रतीक एशिया के अलग-अलग देशों से आए खिलाड़ियों और खेलों को एक साथ जोड़ने वाली कहानी कहते हैं।
अलग संस्कृतियां, अलग शैलियां और एक साझा भावना
- इन चित्रों में एशियन गेम्स की विविधता भी नजर आती है। जिस तरह प्रतियोगिता में अलग-अलग देशों के खिलाड़ी और विभिन्न खेल एक जगह जुटे हैं, उसी तरह इस प्रदर्शनी में अलग संस्कृतियों और कलात्मक शैलियों का मेल देखने को मिलता है।
- खेल को सिर्फ प्रतियोगिता, जीत और हार के नजरिए से देखने के बजाय ये चित्र बताते हैं कि खेल लोगों की कल्पना और भावनाओं में भी अपनी जगह बनाता है। एक एथलीट की गति, मुकाबले का रोमांच और खेल से जुड़ी उम्मीदों को कलाकारों ने अपने-अपने तरीके से कैनवास पर उतारा है।
- मेन मीडिया सेंटर में दिनभर नतीजों, खबरों और डेडलाइन के बीच काम कर रहे पत्रकारों और अन्य आगंतुकों के लिए यह प्रदर्शनी एक छोटा-सा विराम भी देती है। बड़े स्टेडियमों, भीड़ और पदकों से दूर ये चित्र याद दिलाते हैं कि खेल सिर्फ प्रतिस्पर्धा नहीं है, इसे देखा, महसूस किया और कला के जरिए अभिव्यक्त भी किया जा सकता है।