सुचिका (दाएं) और तेओ (बाएं) का मुकाबला
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सुचिका और तेओ का मुकाबला
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700 ग्राम ने बदल दिया पूरा नतीजा
सुचिका अपनी सिंगापुर की प्रतिद्वंद्वी तेओ हुई हून से 700 ग्राम अधिक वजन की थीं। ड्रॉ होने के बाद वजन के नियम के तहत फैसला सिंगापुर की खिलाड़ी के पक्ष में चला गया और सुचिका फाइनल की दौड़ से बाहर हो गईं। इस तरह मैट पर मुकाबला बराबरी का रहने के बावजूद सुचिका को फाइनल में जगह नहीं मिल सकी। उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।
सुचिका और तेओ का मुकाबला
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पहले राउंड में सुचिका का दबदबा
सेमीफाइनल की शुरुआत में सुचिका ने आक्रामक अंदाज अपनाया। उन्होंने घुटने से कई वार किए और तेओ को लगातार क्लिंच में रखकर मुकाबले पर नियंत्रण बनाने की कोशिश की। पहले राउंड के करीब दो मिनट बाद सुचिका ने सिंगापुर की खिलाड़ी को जमीन पर गिराया और कई मुक्के लगाए। तेओ के दोबारा खड़े होने के बाद भी भारतीय खिलाड़ी ने कॉम्बिनेशन पंच जारी रखे। राउंड खत्म होने का हूटर बजने के बाद भी दोनों खिलाड़ी एक-दूसरे पर वार करती रहीं। स्थिति को संभालने के लिए रेफरी को दोनों को अलग करना पड़ा।
दूसरे राउंड में दोनों के बीच कांटे की टक्कर
दूसरे राउंड में सुचिका ने अपनी रणनीति बदली और तेओ की पहुंच से दूर रहने की कोशिश की। उनके कोच लगातार उन्हें करीब जाकर क्लिंच करने के लिए कह रहे थे। राउंड की शुरुआत में तेओ ने दबदबा बनाया और सुचिका को सबमिशन कर दिया। हालांकि, भारतीय खिलाड़ी ने जल्द वापसी की और तेओ के ऊपर पहुंच गईं। इसके बाद सिंगापुर की खिलाड़ी ने एक बार फिर सुचिका को सबमिट किया। राउंड के आखिरी हिस्से में सुचिका सबमिशन से बाहर निकलने में सफल रहीं और उन्होंने तेओ को भी सबमिट कर दिया। उन्हें लगा कि उन्होंने मुकाबला अपने नाम कर लिया है, लेकिन निर्णायक नतीजे के लिए फैसला बाकी था। जज किसी एक खिलाड़ी के प्रदर्शन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुए और मुकाबला तीसरे और आखिरी राउंड तक पहुंच गया।
आखिरी राउंड के बाद सुचिका की आंखों में आंसू
तीसरे राउंड में तेओ ने कई किक्स लगाईं। सुचिका कुछ हद तक रक्षात्मक रहीं और निर्णायक वार के मौके का इंतजार करती रहीं। मुकाबले के आखिरी पलों में सुचिका ने कुछ कॉम्बिनेशन पंच लगाए। तेओ ने भी किक्स से जवाब दिया। अंतिम बजर बजने के बाद सुचिका ने अपनी प्रतिद्वंद्वी पर छलांग लगाकर उसे जमीन पर गिरा दिया। रेफरी को दोनों खिलाड़ियों को अलग करना पड़ा। मुकाबला खत्म होने के बाद सुचिका फैसले से खुश नहीं थीं। उन्होंने रेफरी से हाथ मिलाने से भी इनकार कर दिया और मैट पर ही भावुक होकर रोने लगीं।
सुचिका को लगा कि उन्होंने फाइनल में पहुंचने के लिए पर्याप्त प्रदर्शन किया है। हालांकि, समीक्षा के बाद मुकाबला ड्रॉ घोषित हुआ और 700 ग्राम के वजन के अंतर ने फैसला सिंगापुर की खिलाड़ी के पक्ष में कर दिया। फाइनल से चूकने के बावजूद सुचिका ने भारत के लिए ऐतिहासिक कांस्य पदक जीता। पारंपरिक मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में यह भारत का ऐतिहासिक पदक रहा।