पारुल ने पांच हजार मीटर दौड़ के फाइनल में 15:14:75 मिनट का समय लिया। शुरुआती 4000 मीटर तक पारुल पांचवें छठे स्थान पर थीं। आखिरी हजार मीटर में वह शीर्ष तीन और आखिरी 200 मीटर में शीर्ष दो में पहुंच गईं। जापान की रिरिका हिरोनाका उनसे आगे चल रही थीं। आखिरी 30 मीटर में पारुल ने गजब की हिम्मत दिखाई और जापान की रिरिका से आगे निकल गईं। जापान की रिरिका ने 15:15.34 मिनट का समय लिया और रजत जीता। कजाकिस्तान की चेपकोएच 15:23.12 मिनट के समय के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
आखिरी 30 मीटर का वीडियो-
एशियाड में महिलाओं की पांच हजार मीटर दौड़ में भारत ने इससे पहले कभी स्वर्ण नहीं जीता है। 1998 से यह खेल एशियाई खेलों का हिस्सा रहा है। 1998 बैंकॉक एशियाई खेलों में सुनीता रानी ने रजत, 2002 बुसान एशियाई खेलों में सुनीता रानी ने कांस्य, 2006 दोहा एशियाई खेलों में ओपी जैशा ने कांस्य, 2010 ग्वांग्झू एशियाई खेलों में कविता राउत ने कांस्य जीता था। 2014 इंचियोन और 2018 जकार्ता एशियाई खेलों में भारत को इस स्पर्धा में कोई पदक हासिल नहीं हुआ था। 13 साल बाद भारत ने महिलाओं की पांच हजार मीटर दौड़ में पदक जीता और वह भी स्वर्ण जीता।
इससे पहले पारुल ने सोमवार को महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज में रजत जीता था। फाइनल में बहरीन की यावी विनफ्रेड मुतिले ने 9:18:28 के समय के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पारुल 9:27:63 के समय के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। दो दिन में दो पदक जीतकर पारुल ने कमाल कर दिया है। राष्ट्रगान के समय पारुल काफी भावुक नजर आईं। पारुल के नाम तीन हजार मीटर स्टीपलचेज, तीन हजार मीटर दौड़ और पांच हजार मीटर दौड़ का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी है।