तो क्या अब आनंद युग खत्म हो चुका है। गैरी कास्परोव और व्लादिमिर क्रैमनिक जैसे शतरंज के शहंशाहों को दिमागी कसरत के इस नायाब खेल में शह और मात देने वाले विश्वनाथन आनंद की चालें और चतुराई अब अबूझ नहीं रही गईं हैं।
भारतीय दिग्गज आनंद को एक बार फिर अपनी चालों में उलझाकर नार्वे के मैग्नस कार्लसन ने लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन का तमगा हासिल कर लिया। इससे पहले कार्लसन ने चेन्नई में पिछले साल हुई विश्व चैंपियनशिप में आनंद को मात दी थी।
कार्लसन ने पांच बार के विश्व चैंपियन आनंद को रविवार को खेली गई वर्ल्ड चैंपियनशिप की 11वीं बाजी में मात देकर महानता की ओर एक और कदम बढ़ा दिया। कार्लसन ने यह चैंपियनशिप 6.5 अंक हासिल कर अपने नाम की, जबकि 11 बाजियों के बाद आनंद महज 4.5 अंक ही हासिल कर पाए।