मैग्नस कार्लसन के हाथों अपने ही घर में विश्व खिताब गंवाने के बाद पांच बार के वर्ल्ड चैंपियन विश्वनाथन आनंद के लिए दुनिया बदल सी गई थी।
खुद आनंद की मानें तो वह अवसाद में चले गए थे और वह इस कदर सदमे से थे कि उन्होंने अगले दो महीने तक शतरंज बोर्ड को हाथ तक नहीं लगाया था। यहां तक विश्व खिताब की रक्षा के लिए चैलेंजर के चयन को खेले जाने वाले कैंडीडेट्स टूर्नामेंट में नहीं खेलने का मन बना लिया।
लेकिन बेटे के साथ खेलना, परिवार के साथ बिताए समय और शतरंज की पूरी तरह तिलांजलि देने के बाद ही आनंद में नई ऊर्जा का संचार हुआ और वापसी की ठानी और इसके बाद तो सब कुछ परी कथा सरीखा है।
कार्लसन से बदला लेने की तैयारी में जुटे
अब विश्वनाथन आनंद नार्वे के ग्रैंडमास्टर कार्लसन से विश्व खिताब छीनने की सोचने लगे हैं।
आनंद खुलासा करते हैं कि कार्लसन से हार के बाद का समय काफी कठिन था। वह अपनी उस गलती को भी स्वीकार करते हैं कि जब अवसाद में रहते हुए उन्होंने कैंडीडेट्स में नहीं खेलने की घोषणा कर दी थी।
आनंद कहते हैं कि उन्हें अपने इस निर्णय को सभी के सामने नहीं खोलना चाहिए था। इस साल जनवरी तक उन्होंने शतरंज के बारे में सोचा तक नहीं। ज्यूरिख और बुंडसलीगा में अच्छे परिणाम नहीं मिलने के बाद वह वापस एक बार फिर घर चेन्नई आ गए।
लंबे समय बाद माना, वो नहीं हैं वर्ल्ड चैंपियन
आनंद ने दो सप्ताह तक न कोई तैयारी की और न ही शतरंज के बारे में बात की। इसके बाद वह बिना तैयारी के ही रूस में कैंडीडेट्स खेलने चले गए। यहीं पर उनके अंदर ऐसी ऊर्जा का संचार हुआ कि उन्हें वापसी करनी है और यहीं उन्होंने इस सच्चाई को स्वीकार किया कि वह अब वर्ल्ड चैंपियन नहीं हैं।
आरोनियन को पहली बार सफेद मोहरों से पहले ही मुकाबले में हराने के बाद नई ऊर्जा मिली लेकिन नौवें गेम में टोपोलोव को हराने के बाद ही अहसास हुआ कि वह टूर्नामेंट जीतकर कार्लसन को फिर चुनौती दे सकते हैं।
आनंद खुलासा करते हैं कि उन्होंने तैयारियों के बारे में सोचना शुरू कर दिया है लेकिन आयोजन स्थल का खुलासा होने के बाद ही वह इसे अंतिम रूप देंगे। सेकेंड्स की टीम भी तभी घोषित करेंगे। खास बात यह है कि आनंद इस साल कोर्सिका में आमंत्रण टूर्नामेंट के बाद दुबई और जेनेवा में रैपिड फायर टूर्नामेंट खेलेंगे।