अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) ने बागी खिलाड़ियों की नई मांगें ठुकराते हुए कहा है कि जब तक खिलाड़ी राष्ट्रीय महासंघ के चुनावों मे जीत दर्ज नहीं करते तब तक उन्हें कार्यकारी या चयन समिति में शामिल नहीं किया जा सकता। एआईटीए के मुताबिक खिलाड़ियों के साथ मतभेद दूर करने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है जो अपना काम कर रही है।
संघ ने कहा कि यदि खिलाड़ी खुद को उपलब्ध कराते हैं तो उनके नाम पर चयन के लिए विचार किया जाएगा।
बागी खिलाड़ियों का नेतृत्व कर रहे देश के शीर्ष खिलाड़ी सोमदेव देववर्मन ने राष्ट्रीय महासंघ और चयन समिति का फिर से गठन करने और उसमें खिलाड़ियों को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की नई मांग की है।
इससे पहले एआईटीए डेविस कप की पुरस्कार राशि बढ़ाने, बिजनेस श्रेणी का हवाई टिकट देने, सपोर्ट स्टाफ में बदलाव करने और घरेलू मैचों में स्थानों के चयन में खिलाड़ियों की सलाह लेने जैसी खिलाड़ियों की अधिकतर मांगें स्वीकार कर चुकी है। एआईटीए के मुख्य कार्यकारी हिर्णोमय चटर्जी ने कहा, ‘हम इस मतभेद को ईमानदारी से सुलझाना चाहते हैं लेकिन मुझे लगता है कि खिलाड़ी केवल असहमत होने पर ही सहमत हुए हैं। कुछ खिलाड़ी घटिया राजनीति खेल रहे हैं और उन्होंने कई खिलाड़ियों का कैरियर मुश्किल में डाल दिया है।
खिलाड़ियों को इस बात की जानकारी नहीं है कि महासंघ का गठन कैसे होता है और यह कैसे काम करता है। यदि वे एआईटीए में आना चाहते हैं और बदलाव करना चाहते हैं तो उनका स्वागत है लेकिन पहले उन्हें राज्य संघ से चुनकर आना होगा जो उन्हें राष्ट्रीय महासंघ के लिए नामित कर सकते हैं। वे सीधे महासंघ में आने के बारे में कैसे सोच सकते हैं।’
खिलाड़ियों ने एआईटीए के साथ मतभेद दूर करने के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि समिति पक्षपात कर सकती है लेकिन एआईटीए ने कहा कि समिति अपना काम जारी रखेगी।