केसों के जल्द निपटारे का फैसला
आईओए का प्रमुख काम राष्ट्रीय खेल का आयोजन कराना, राष्ट्रीय खेल संघों और राज्य ओलंपिक संघों की आर्थिक मदद करना, ओलंपिक, एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों के लिए टीमें भेजना है, लेकिन आईओए जबरदस्त रूप से मुकदमेंबाजी में उलझी है। एक अनुमान के मुताबिक आईओए इस वक्त ढाई सौ से अधिक केस में उलझी है। 4.23 करोड़ रुपये की राशि तब खर्च की गई जब उस पर सिर्फ 74 केस चल रहे थे। आमसभा में फैसला लिया गया कि इन केसों का निपटारा जल्द से जल्द कर इनकी संख्या कम करना है।
बतौर पर्यवेक्षक बैठे मंत्रालय के अधिकारी
आमसभा में आईओए की ओर से खेल मंत्रालय के अधिकारियों को बतौर पर्यवेक्षक आमंत्रित किया गया। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के चार्टर के अनुसार उसके सदस्यों की कार्यप्रणाली में सरकार का हस्तक्षेप वर्जित है। अमूमन आईओए की आमसभा में बाहरी व्यक्ति नहीं शामिल होते हैं। इसमें सिर्फ उसके सदस्य ही बैठते हैं।
44 करोड़ का बजट हुआ पास
आमसभा में आईओए का 44 करोड़ रुपये का बजट पास हुआ है, जिसमें 31.40 करोड़ रुपये का खर्च है। वहीं 31 राज्य ओलंपिक संघों ने पीटी उषा को ज्ञापन दिया कि उनके वोटिंग अधिकार एक बार फिर से बहाल किए जाएं।