दस बारह घंटे लगातार काम करने के बाद अक्सर छह-सात घंटे की नींद जरूरी होती है। नहीं सोएं तो दो-तीन बाद बीमार पड़ने की आशंका हो जाती है। लेकिन योग ने और अब विज्ञान ने भी कहा कि पंद्रह से चालीस मिनट की एक गहरी नींद आयोजित कर ली जाए तो आठ दस घंटे बचाए जा सकते हैं और ताजगी गहरे विश्राम जैसी।
योग ने इस विधि से मिले विश्राम को योगनिद्रा कहा है। योगदर्शन के अब तक के सबसे लोकप्रिय और सर्वांगपूर्ण भाष्य स्वामी ओमानंद तीर्थ का कहना है कि अभ्यास कायदे से किया जाए तो दिन में बाईस-तेईस घंटे काम किया जा सकता है।
योगनिद्रा पर काम कर रहे रूस के फिजिओलाजिस्ट एंकतिया चोस्की ने कहा है कि सचमुच बिना सोए काम करते रहा जा सकता है। महाभारत में अर्जुन के निद्राजित कहे जाने का सच जानने और योग का अध्ययन करते समय उन्होंने नींद की जरूरत पर खोज और प्रयोग शुरु किए। पाया कि नींद के समय व्यक्ति शरीर एवं श्वास के प्रति अचेत रहता है।