कितने ही संवेदनशील और उन्नत कैमरे बन जाएं, लेकिन वे आंखो की तरह संवेदनशील और सक्रिय नहीं हो सकते। आंखों की पलकें एक मिनट में तीस सेकेंड बन्द रहती और लगभग उतनी ही देर खुली रहती हैं। यह सिलसिला निरंतर और अनायास ही चलता रहता है। पर आश्चर्य कि इसका पता तक नहीं चलता।
शरीर विज्ञानियों के अनुसार आंखें गर्भस्थ शिशु के पांच महीने का होते तक बन पूरी जाती हैं। जन्म के बाद छह वर्ष की उम्र तक उनका विकास होता रहता है। लेकिन मस्तिष्क के जिन केंद्रों से उसका जुड़ाव बनता है, उनका विकास होने में करीब पचीस वर्ष लग जाते हैं।
नवसारी (गुजरात) मेडिकल कालेज में पेडियाट्रिक विभाग की प्रमुख डा. लीला बेंजामिन का कहना है कि शरीर के विकास की यह प्रक्रिया पचीस वर्ष की उम्र में स्थिर हो जाती है। सभ्यता के विकास और प्रयोगों की शुरुआती शताब्दियों तक पचीस वर्ष की उम्र गुरुकुलों में या विद्यापीठों में ही बिताई जाती थी। उसका कारण शरीर और मन का पूरी तरह विकसित हो जाना ही रहा हो तो कोई आश्चर्य नहीं है।