उपवास के दौरान राजसी-तामसी वस्तुओं के इस्तेमाल से पूरी तरह परहेज बरतने को अनूशासन बताया गया है। अपेक्षा की जाती है कि यह अनुशासन यथासंभव हमेशा बरता जाए। हमेशा नहीं हो सके तो ज्यादा से ज्यादा। इस अनुशासन से सात्विकता का मार्ग खुलता है शुरुआत भोजन से होती है। सवाल है कि कौन सा भोजन सात्विक है, जो उपवास में ग्रहण किया जा सकता है।
इसका जवाब है- दूध, घी, फल और मेवे। उपवास में ये आहार इसलिए मान्य है कि ये भगवान को अर्पित की जाने वाली वस्तुएं हैं। प्रकृति प्रदत्त यह भोजन शरीर में सात्विकता बढ़ाता है।
भगवद्गीता के अनुसार मांस, अंडे, खट्टे और तले हुए, मसालेदार और बासी या संरक्षित व ठंडे पदार्थ राजसी-तामसी प्रवृतियों को बढ़ावा देते हैं। इसलिए उपवास के दौरान इनका सेवन नहीं किया जाना चाहिए।