उम्र बढ़ाने या देर तक युवा दिखने के लिए आइंस्टीन के मंहगे और असंभव से लगने वाले फार्मूले को अपनाना जरूरी नहीं है। ताजा खोज यह है कि ध्यान के जरिए भी वैसी सिद्धियां हासिल की जा सकती है।
ओहियो गुरुत्वाकर्षण के बाहर उम्र बढ़नी रुक जाती है। अमेरिका में ओहियो विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में हुए प्रयोगों और अध्ययनों से सैद्धांतिक तौर पर साबित हो चुका है कि ध्यान से बढती हुई उम्र की रफ्तार थामी जा सकती है।
इस प्रयोग की अध्यात्मिक आंकलन करते हुए अध्ययन प्रोजेक्ट के संयोजक प्रो. सरन ने कहा है कि ध्यान हमारी ऊर्जा के साथ शरीर की गतिविधियों को भी चुस्त दुरुस्त करता है। उसका यह प्रभाव ही शरीर की उम्र कम करता है।
प्रो. सरन के मुताबिक सुस्ती और अस्तव्यस्तता के कारण शरीर की ऊर्जा असाधारण रूप से खर्च होती है। उसका असर शरीर को अनावश्यक रूप से थका देने के रुप में होता है। शोध अध्ययन में लगे एक अन्य प्राध्यापक डा. एस वेलिंगटन के अनुसार आसान शब्दों में ध्यान व्यक्ति को सजग और संयत करता है।
मनुष्य की तंद्रा को तोड़ता है। आमतौर पर इंसान दिन भर जो काम करता है, वह बेहोशी में ही करता है। अगर वह सजग हो जाए तो जो ऊर्जा कार्य की गति में बरबाद होती है। वह नहीं होगी। इसके विपरीत व्यक्ति अधिक उर्जावान महसूस करेंगा। ध्यान करने वाले साठ पैंसठ वर्ष की उम्र में भी बीस पचीस किलोमीटर रोज पैदल चल लेते हैं और उन्हें थकावट महसूस नहीं होती।
वे और अधिक प्रफुल्लित महसूस होते है। प्रो. वेलिंगटन के अनुसार जब हम होश में भर कर, सजग हो कर चलते हैं तो हमारे कदम जमीन पर तो पड़ते है। पर जमीन उन्हें खींच नहीं पाती। लगता है हम हवा में उड़ रहे है।