सुबह उठते ही स्तोत्र, वंदना और पुण्यश्लोकों के अलावा सत्साहित्य यानी परिस्थितियों और समाज के प्रति आस्था और विश्वास जगाने वाली पुस्तकें पढ़ना मनुष्य के आंतरिक जीवन को समृद्ध और शक्तिशाली बनाता है।
ऐसे व्यक्ति जीवन में आने वाली परेशानियों को आसानी से झेल जाते हैं। इसके विपरीत उठते ही कुछ भी नहीं पढ़ने या घंटे दो-चार घंटे में ही दम तोड़ देने वाली खबरों से जुड़ने वाले लोगों को तनाव और अवसाद का सामना ज्यादा करना पड़ता है। वाशिंगटन से प्रकाशित होने वाले क्रिश्चियन मानीटर संस्थान द्वारा प्रकाशित शोध 'प्लस वन' नामक जर्नल में यह अध्ययन प्रकाशित हुई है।
करीब छह सौ लोगों से की गई पूछताछ के दौरान मिले उत्तरों पर आधारित इस अध्ययन के अनुसार सुबह उठते ही प्रेरक और आध्यात्मिक विचारों के संपर्क में रहने वाले लोगों का जीवट कुछ भी नहीं करने वालों की तुलना में ज्यादा मजबूत होता है। अध्ययन में शामिल किए गए चालीस प्रतिशत लोग सुबह उठते ही ईश्वर के प्रति धन्यवाद या उसकी कृपा के लिए प्रार्थना करते थे।
ऐसे व्यक्ति तनाव से मुक्त रहते थे। इनके अलावा बयालीस प्रतिशत लोग ऐसे थे जो उठते ही प्रार्थना करने के बाद रोजमर्रा के कामों में जुट जाते थे। प्रार्थना के बाद आई प्रफुल्लता उनके दैनिक जीवन में भी दिन भर कायम रहती थी। इस तरह के अभ्यास या स्मरण और संपर्क से वंचित लोग अपेक्षाकृत ज्यादा तनाव और निराशा से घिरे रहते थे।
महिलाओं में पाया गया कि संवेदवशील होने के कारण तनाव का ज्यादा सामना करती हैं। अच्छी प्रेरणाओं और धार्मिक क्रियाओं से उन्हें राहत तो मिलती है पर विपरीत परिस्थितियों का सामना पुरुषों की तुलना में ज्यादा सफलता पूर्वक करती थी। मनोविज्ञानियों के अनुसार इसका कारण उनका अधिक संवेदनशील होना था।
यह भी कि महिलाएं जब हत्या और बलात्कार जैसी घटनाओं से वाकिफ होती या ऐसी खबरें पढ़ती हैं तो उनके व्यवहार पर भी असर पड़ता था। इस तरह की सूचनाएं पाने या खबरें पढ़ने से उनमें स्ट्रेस-हॉरमोन का स्तर बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की सूचनाएं तनाव का स्तर सीधे-सीधे नहीं बढ़ाती है।
दिमागी तौर पर ये व्यक्ति को ज्यादा सक्रिय कर देती हैं। शोधकर्ता मैरी फ्रांस मेरीन के अनुसार अच्छी यानी प्रेरक और बुरी यानी नकारात्मक खबरों के प्रभाव की जांच के लिए कोर्टिसोल हॉर्मोन का स्तर नापा गया जो तनाव के लिए ज़िम्मेदार होता है। पता चला कि सुबह उठते ही प्रेरक या विधायक विचारों, प्रेरणाओं और आध्यात्मिक साहित्य का अध्ययन करने वालों के कोर्टिसोल हार्मोन में बुरी खबरों के संपर्क में आने पर भी कोई बदलाव नहीं आया।