कश्मीरा की कहानी, जिसने मनन को जताया कि परिवार के लिए उसका मोल ज्यादा है, प्रमोशन का नहीं।
सात बजते ही दरवाजे की घंटी बजी। कश्मीरा ने दौड़कर दरवाजा खोला, तो देखा, मनन मुस्कराते हुए दरवाजे पर खड़ा है। कश्मीरा ने पूछा, क्या प्रमोशन मिल गया? मनन खुशी के साथ बोला, हां, और इस बार डबल इंक्रिमेंट भी मिला। कश्मीरा बोली, चलो, जल्दी से कपड़े बदल कर डाइनिंग रूम में आ जाओ। डाइनिंग रूम में घुसने पर मनन ने देखा, वहां मद्धिम
रोशनी जल रही थी और मेज पर उसका मनपसंद खाना सजा हुआ था। पास में एक गुलदस्ता भी था।
यह सब देख मनन की खुशी दोगुनी हो गई। उसने कश्मीरा से पूछा, क्या तुम्हें ऑफिस से फोन कर किसी ने बता दिया था? कश्मीरा बोली, नहीं। मनन ने पूछा, फिर क्या तुम्हें पापाजी ने बताया? कश्मीरा ने कहा, मुझे नहीं पता कि पापाजी को भी यह बात पता है। मनन सोच में पड़ गया। वह जब खाने की टेबल पर पहुंचा, तो देखा कि वहां एक छोटा-सा कार्ड रखा है, जिस पर लिखा है, मुझे पता था कि तुम्हें इस बार प्रमोशन जरूर मिलेगा। हम सबको तुम पर गर्व है। मनन फिर सोच में पड़ गया। जब गर्मागर्म रोटियां बनाने के बाद कश्मीरा टेबल पर आई, तो मनन ने कहा, तुमने इतनी तैयारी ऐसे ही तो नहीं की होगी।
तुम्हें कैसे पता चला कि मुझे प्रमोशन मिला है? कश्मीरा बोली, यह सब तो मुझे करना ही था, क्योंकि कल ही तुमने कहा था कि आज पता चल जाएगा, प्रमोशन मिला है कि नहीं। मनन बोला, पर मुझे प्रमोशन मिल ही जाएगा, यह तुम्हें कैसे पता चला? कश्मीरा बोली, क्योंकि मुझे तुम पर विश्वास है। यह कहकर कश्मीरा फिर किचन में जाने लगी, तभी उसकी जेब से एक और कार्ड गिर गया। मनन ने वह कार्ड पढ़ा। उस पर लिखा था, तुम्हारी मेहनत ही तुम्हारी सफलता है। तुम्हें प्रमोशन न मिले, तो भी तुम हम सबके लिए उतने ही प्रिय और अनमोल रहोगे।