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सीख: अपना सच अपने अंदर होता है, किसी के कहने से वह सच, झूठ नहीं बन जाता

Thu, 25 Jan 2018 07:28 PM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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sadness
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रिमी हर हफ्ते की सब्जी एक साथ ही मंगलवार को ले आती थी। हर बार की तरह उस दिन भी जब वह वहां पहुंची, तो देखा उसका भिंडी वाला एकदम अकेला खड़ा है। रिमी ने सोचा, इससे पहले कि कोई और उसकी दुकान पर पहुंच जाए, वह उससे भिंडी ले ले। रिमी ने उससे भिंडी के भाव पूछे। दुकानदार बोला, माफ कीजिएगा, मेम साहब, आज मैं भिंडी नहीं दे सकता। रिमी हैरान रह गई और उससे पूछा, लेकिन क्यों? दुकानदार बोला, बस मैं आज किसी को भिंडी नहीं दे सकता। रिमी को बड़ा अटपटा-सा लगा।
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रिमी आगे बढ़ गई और अन्य सब्जियां खरीदने लगी। उसने दूसरे दुकानदार से पूछा, भैया, क्या आप जानते हैं आज वह भिंडी वाला भिंडी क्यों नहीं बेच रहा? दुकानदार बोला, अरे वह पागल है, मेम साहब। आप कहीं और से भिंडी ले लो। रिमी ने फिर पूछा, लेकिन हुआ क्या है? दुकानदार बोला, मेम साहब, आप तो जानती ही हैं, ये सारी सब्जियां गांव से बोरों में भरकर ट्रकों में आती हैं। कल रात जो ट्रक भिंडी के बोरे लेकर आई, उसमें किसी ने कोई केमिकल भी भिंडी के साथ रखवा दिया था। ट्रक ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चली, और वह सारा केमिकल ट्रक की फर्श पर गिर गया, जो कि भिंडी के बोरों में भी चला गया। बाकी के सारे सब्जी वालों ने अपनी भिंडी धो ली और दोबारा बेचने लगे, लेकिन वह पागल अपना नुकसान कराने पर तुला है।

यह सुनकर रिमी वापस भिंडी वाले के पास गई और उससे पूछा, तुम भिंडी धोकर क्यों नहीं बेच देते? भिंडी वाला बोला, मेम साहब, ऐसा करके मैं पैसे तो कमा लूंगा, लेकिन अगर किसी एक भी ग्राहक को नुकसान हुआ, तो मैं खुद को जवाब नहीं दे पाऊंगा। रिमी बोली, अरे कौन देख रहा है? तुम अपना काम करो और अपने परिवार और बच्चों को देखो। दुकानदार बोला, मेम साहब, यही तो बात है। आज मेरा छोटा बेटा मेरे साथ भिंडी बेचने आया है। मैं उसको गलत काम नहीं सिखाना चाहता।
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अपना सच अपने अंदर होता है। किसी के कहने से वह सच, झूठ नहीं बन जाता।
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