विक्रम की कहानी, जिसे नीरज की एक मदद जिंदगी में बहुत बड़े मुकाम पर ले गई।
नीरज ऑफिस से घर लौट रहा था। एक सिग्नल पर इंतजार करते हुए उसने देखा कि उसी की उम्र का एक लड़का अपने कंधे पर लैपटॉप बैग और हाथ में कुछ फाइलें लेकर पटरियों पर चल रहा था। अचानक वहां कुछ कुत्ते आ गए और भौंकने लगे, जिससे लड़के का संतुलन बिगड़ गया और वह वहीं गिर गया। नीरज ने अपनी गाड़ी रोकी और उस लड़के को सहारा देकर उठा लिया। उसके घुटनों पर चोट आ गई थी। नीरज ने उससे कहा, मेरा घर पास में है, चलो इसे एक बार धोकर कुछ दवा लगा लेना।
लड़के ने मना किया, पर नीरज उसे अपने घर ले गया। लड़के ने बताया कि उसका नाम विक्रम है और वह एक ट्रैवल एजेंसी में काम करता है। दोनों में दोस्ती हो गई। नीरज की कंपनी में एक नए अकाउंटेंट के लिए जगह खाली हुई। चूंकि विक्रम को अपने ऑफिस में कम पैसे मिलते थे, लिहाजा नीरज ने विक्रम को अपने ऑफिस में नौकरी दिलवा दी। कुछ दिनों बाद नीरज ने अपनी नौकरी बदल ली और दूसरे शहर में रहने चला गया। पर दोनों की दोस्ती बनी रही। एक दिन विक्रम ने नीरज को कॉल किया कि मैंने अपनी एक नई कंपनी शुरू की है और कंपनी ने दो साल में ही बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है।
इसीलिए मुख्यमंत्री मुझे सम्मानित करने वाले हैं। अच्छा हो कि उस कार्यक्रम में आप आएं। नीरज कार्यक्रम में पहुंचा। मंच पर मुख्यमंत्री से पुरस्कार लेने के बाद विक्रम बोला, आज से करीब दस साल पहले मैं जिंदगी से मायूस हो चुका था। मेरे पास पैसे नहीं थे, और मुझे कोई नौकरी नहीं देना चाहता था। मैं अपनी जिंदगी खत्म करने जा रहा था कि पता नहीं, कहां से मेरा दोस्त नीरज वहां पहुंच गया, जिसने मेरी जान बचाई, मुझे जीना सिखाया और बाद में मेरी पहली नौकरी भी उसी ने दिलाई। मैं आज जिंदा हूं, तो नीरज की वजह से। मैं जो भी हूं, यह सब उसका है।