शेर रोज शिकार पर जाता, शिकार करता और उसका सबसे लजीज टुकड़ा अपने बच्चे के लिए लेकर आता। बच्चे ने सोचा, मैं भी तो शेर हूं, क्यों न आज मैं खुद शिकार करूं? वह जब शिकार पर निकला, तो उसे एक बैल दिखाई दिया। उसने सोचा, आज मैं इसी का शिकार करूंगा और वह बैल पर लपक पड़ा।
बैल ने अपनी सींग से ठोकर मारकर शेर के बच्चे को दूर फेंक दिया। शेर दूर खड़ा यह देखता रहा। सुमन ने पूछा, इसका क्या अर्थ हुआ? सुमन की मां बोली, हर माता-पिता हमेशा अपने बच्चे का भला चाहते हैं और उसके हुनर को निखारने के लिए सही समय पर मंच प्रदान करते हैं।
हमें पता है कि तुममें वह हुनर है। पर सफलता के लिए खुद को हर गुण से संपन्न बनाना पड़ता है। यह समय खुद को निखारने-संवारने का है। आज तुम अगर स्वयं को मजबूत कर लोगे, तो कल सफल होने से तुम्हें कोई रोक नहीं सकेगा।
सफलता हासिल करने के लिए अपनी तैयारी पूरी होनी चाहिए।