सेठ रामचंद मंडी में घुसे ही थे कि सारे दुकानदार अपने ग्राहकों को छोड़ सेठ को देने के लिए पैसे इकट्ठा करने लगे। ग्राहक हैरान थे कि क्या यह शख्स इन सब्जी वालों से वसूली करने आया है। तभी एक गोभी बेचने वाला सेठ रामचंद के पास गया और उनके सामने झुककर बोला, सेठ, इस बार मैं पिछले वाले दस हजार रुपये नहीं दे पाऊंगा। मुझे थोड़ा और समय चाहिए। सेठ ने उसे जोर की लात मारी और कहा, जब मैंने तुमसे कहा था, तब तो तुमने सुनी नहीं। अब आए हो, मेरे पास समय मांगने? दूर हो जाओ मेरी नजरों से।
यह देखकर वहां मौजूद एक ग्राहक का खून उबल पड़ा। वह तैश में सेठ रामचंद की तरफ आगे बढ़ने लगा, जैसे कि वह उनसे झगड़ने जा रहा हो। यह देख एक फलवाले ने उसे बीच में ही रोक लिया और पूछा, क्या हुआ भाई साहब? बड़े गुस्से में लग रहे हो। वह ग्राहक बोला, तुम लोग इस शख्स के अत्याचार कैसे सह लेते हो? अपने हक की लड़ाई लड़ो। फल वाला बोला, शायद आपको पता नहीं कि सेठ रामचंद कौन हैं। वह ग्राहक बोला, तुम्हें क्या लगता है, मैं उससे डर जाऊंगा? फल वाला बोला, यहां जितने भी फल या सब्जी वाले हैं, उन्हें मरणावस्था से उठाकर सेठ रामचंद यहां तक लेकर आए हैं। किसी को उनके बच्चों ने बाहर कर दिया, तो कोई खुदकुशी के लिए चला था। कोई व्यापार में विफल रहा, तो किसी के भूखे मरने की स्थिति थी।
सेठ रामचंद पिता की तरह हम सबको एक नई जिंदगी देने के लिए हर रोज डांट लगाने आते हैं, जिससे कि हमारी जिंदगी का महत्व बना रहे। यह सारा पैसा, जो वह इकट्ठा कर रहे हैं, वह हमारे खुद के नए घर के लिए जाता है। ग्राहक बोला, लेकिन वह गोभी वाला? उसका क्या? फल वाला बोला, पिछले हफ्ते उसको किसी ने बताया कि कोई नई स्कीम है, जिसमें दस हजार रुपये देने पर एक लाख रुपये मिलेंगे। आप तो जानते ही हैं कि ऐसी स्कीमें फर्जी होती हैं। वह गोभी वाला अब पछता रहा है।
अमर उजाला के हरियाली और रास्ता से साभार