नूरी की कहानी, जिसने एक ऐसे भिखारी को जिंदगी जीने की उम्मीद दी, जो अपने जीवन से निराश हो चुका था।
नूरी ऑफिस से घर वापस लौट रही थी। रास्ते में वह एक दुकान में गई और एक कॉफी व बर्गर खरीदकर खाने लगी। खाते-खाते उसकी नजर बाहर बैठे एक भिखारी पर पड़ी। उसके हाथ में एक कटोरा था। आते-जाते लोग उसमें कुछ-कुछ पैसे डाल रहे थे। जब तक नूरी का बर्गर खत्म होता, उसने देखा वह भिखारी बर्गर की दुकान में आया था।
लेकिन दुकान के सेल्समैन ने उसे भगा दिया। नूरी को यह अच्छा नहीं लगा। नूरी ने काउंटर से एक बर्गर और दो कप कॉफी खरीदी और बाहर जाकर भिखारी के पास बैठ गई। उसने भिखारी से पूछा, क्या तुम बर्गर और कॉफी लोगे? भिखारी ने मना कर दिया। नूरी उसके पास में बैठकर अपनी कॉफी पीने लगी और उससे पूछने लगी, क्या नाम है, कहां से आए हो, भीख क्यों मांगते हो आदि।
धीरे-धीरे भिखारी थोड़ा खुला और फिर उसने बर्गर और कॉफी भी ली। उसने बताया कि वह जब छोटा था, तब उसके माता-पिता उससे बिछड़ गए। उसने उन्हें बहुत ढूंढा, पर वह नहीं मिले। उसने कभी बूट पॉलिश की, कभी मजदूरी की, तो कभी होटलों में बर्तन साफ किए। उसने नूरी को बताया कि वह पहली इंसान है, जिसने उसके लिए बिना बदले में कुछ मांगे कुछ किया। यह सुनकर नूरी को बहुत खराब
लगा। वह सोचने लगी कि सच में परिस्थितियां इंसान को क्या बना देती हैं।
नूरी घर जाने के लिए उठ ही रही थी कि भिखारी ने उसे एक मिनट रुकने को कहा। उसने अपने झोले से एक कागज का टुकड़ा और कलम निकाली और कुछ लिखने लगा। फिर कागज नूरी को दिया और वहां से चला गया। नूरी ने जब वह पढ़ा, तो उसकी आंखों में आंसू थे। उसने चारों तरफ उसे ढूंढने की कोशिश की, पर वह नहीं दिखा। कागज पर लिखा था, मैं आज अपना जीवन हमेशा के लिए खत्म करने जा रहा था। तुमने मुझे एक बार फिर से जीने की उम्मीद दी। तुमने एहसास दिलाया कि मैं अकेला नहीं हूं। मेरी जिंदगी बचाने के लिए शुक्रिया।