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सीख: हमें हर चुनौती के लिए तैयार रहना चाहिए

Tue, 29 May 2018 04:51 PM IST
संपादकीय डेस्क, अमर उजाला
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बैसाखियों के सहारे चलने वाले लड़के की कहानी, जिसने आराध्या को संदेश दिया कि संभलकर चलना जरूरी है।

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प्रोफेसर अविनाश छात्रों को समझा रहे थे कि हमें हमेशा सजग रहना चाहिए। अगर दिमाग हमेशा सजग रहे, तो आधी चुनौतियां तो यों ही हल हो जाएंगी। फिर सफलता आपकी मुठ्ठी में होगी। क्लास छूटने के बाद आराध्या और उसकी दोस्त बातें करते-करते सीढ़ी उतर रही थीं। आराध्या की दोस्त बोली, प्रोफेसर लोगों का यही काम होता है।

खामख्वाह ही छात्रों को डराते रहते हैं। हर किसी की किस्मत अलग होती है। और अगर चुनौतियों के बारे में ही सोचते रहेंगे, तो असल काम कब करेंगे। सब बकवास है। आराध्या कॉलेज की सीढ़ियां उतर ही रही थी कि उसने देखा, सामने से एक लड़का बैसाखियों की मदद से उन्हीं सीढ़ियों से ऊपर चढ़ रहा था। उस लड़के को देखकर वह सोचने लगी, कितना मुश्किल होगा उसके लिए सीढ़ियां चढ़ना। क्या मैं इसकी मदद करूं? फिर उसने सोचा, यह भी तो किस्मत ही है। बेचारा! बहुत संभल कर चलना होगा उसे।
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ऐसे ही लोग अक्सर गिर जाते हैं। वह यह सोच ही रही थी कि तब तक उसका पैर एक सीढ़ी से फिसला और वह सीधे मुंह के बल नीचे गिरने ही वाली थी कि उस बैसाखी वाले लड़के ने उसे पकड़ लिया और गिरने से बचा लिया। वह लड़का बोला, संभल कर। आराध्या एकदम हैरत में थी। वह तो आराम से सीढ़ियां उतर रही थी? बैसाखी वाला लड़का बोला, वहां एक सीढ़ी हल्की-सी टेढ़ी है, जिससे पैर फिसल जाता है। पिछले साल मैं भी वहां से फिसल गया था। शुक्र है, तुम्हें और कहीं चोट नहीं आई।
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सीढ़ी चढ़ते-उतरते वक्त हमें बहुत सजग रहना चाहिए। यह कहकर वह वहां से चला गया। लेकिन आराध्या एकदम मौन रह गई। संभल कर चलना सिर्फ उसके लिए ही जरूरी नहीं होता, जिसे चलने में तकलीफ हो, बल्कि उसके लिए भी होता है, जो ठीक से चल सकता है। पल भर में उसे वह बात समझ में आ गई, जो कुछ देर पहले प्रोफेसर उसे समझा रहे थे और वह नहीं समझ पा रही थी।

हमें हर चुनौती के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि चुनौतियां बताकर नहीं आतीं।

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