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शक्ति से बना संसार, शक्ति करेगी प्रलय काल में संहार

Fri, 04 Oct 2013 02:27 PM IST
डां बीणा चतुर्वेदी ,अमर उजाला, दिल्ली
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जगज्जननी माता दुर्गा धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष चतुर्विध पुरुषार्थों को प्रदान करने वाली है। अखिल ब्रह्मांड नायिका मातेश्वरी जगदंबा ही जगद्धात्री दुर्गा नाम से विख्यात हैं।
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यह परब्रह्म की अभिन्न शक्ति है। विश्व के कल्याणार्थ यही नाना रूपों में प्रकट होती है। यही शक्ति अमृत की अधिष्ठात्री, यज्ञों की विधात्री विश्वरुपिणी हैं। भगवती नित्यस्वरूपा हैं। भगवती की आराधना से सर्वस्व प्राप्त किया जा सकता है। दैहिक, दैविक और भौतिक त्रिविध तापों का शमन करती है। जगत के पदार्थों की तात्कालिक प्राप्ति होती है।

नवरात्र के नौ दिन इनकी पूजा के लिए निर्धारित हैं। दुर्गा का अर्थ है दुर्गमा अर्थात कठिनता से प्राप्ति के योग्य शक्ति। दुर्गा के आठ हाथों में से सात हाथों में शक्ति प्रतीक चक्र, गदा, पद्म, त्रिशूल, खड्ग  और धनुष, ब्रह्मा विष्णु और महेश, जो जगत के निर्माता, पालक और सहांरक के  रूप में जाने जाते हैं, इन सब देवों की शक्ति को माता दुर्गा ने अपने हाथों में समेट लिया है। अष्टभुजारूपि माता दुर्गा  सिंहासनरूढ़ है अर्थात सिंह पर आसीन है।
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दुर्गा ही महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के रूप में प्रकट होती हैं। देवी भागवत के अनुसार देवी ही ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश का रूप धर कर संसार का पालन पोषण और संहार करती हैं। ब्रह्माजी महासरस्वती से युक्त होकर सृष्टि कार्य करते हैं। विष्णुजी महालक्ष्मी के साथ पालन कार्य में समर्थ होते हैं। रुद्र संहार काल में महाकाली का आश्रय लेते हैं।
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