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एक मजाक के कारण राम सीता हुए अलग

Fri, 19 Apr 2013 09:03 AM IST
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
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रावण ने सीता का हरण कर लिया इसलिए राम को सीता का वियोग सहना पड़ा। यह दिखने में जितनी समान्य घटना है उतनी वास्तव में है नहीं।
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तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में लिखा है कि, नारद को अभिमान हो गया था कि वह काम से मुक्त हो गये हैं। विष्णु भगवान ने नारद का अभिमान भंग करने के लिए एक माया नगरी का निर्माण किया।

इस नगर में देवी लक्ष्मी राजकुमारी रूप में उत्पन्न हुईं। इन्हें देखकर नारद मुनि के मन में विवाह की इच्छा प्रबल हो उठी। वह विष्णु भगवान के पास हरि के समान सुन्दर रूप मांगने पहुंच गये। विष्णु भगवान ने नारद की इच्छा के अनुसार हरि रूप दे दिया।
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यह रूप लेकर जब नारद राजकुमारी के स्वयंवर में पहुंचे तो उन्हें विश्वास था कि राजकुमारी उन्हें ही वरमाला पहनाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, उस कन्या ने नारद को छोड़कर दीन हीन रूप में बैठे भगवान विष्णु के गले में वरमाला डाल दिया।

नारद वहां से उदास होकर लौट रहे थे तो रास्ते में एक जलाशय में अपना चेहरा देखा। अपने चेहरे को देखकर नारद हैरान रह गये क्योंकि उनका चेहरा बंदर जैसा लग रहा था। हरि का एक अर्थ विष्णु होता है और एक वानर होता है। भगवान विष्णु ने नारद को वानर रूप दे दिया था। नारद समझ गये कि भगवान विष्णु ने उनके साथ मजाक किया है। इन्हें भगवान पर बड़ा क्रोध आया।

नारद सीधा बैकुण्ठ पहुंचे और आवेश में आकर भगवान को श्राप दे दिया कि आपको मनुष्य रूप में जन्म लेकर पृथ्वी पर जाना होगा। जिस तरह मुझे स्त्री का वियोग सहना पड़ा है उसी प्रकार आपको भी वियोग सहना होगा। वानर रूप देकर आपने मेरा मजाक बनाया है इसलिए आपको वानर की सहायता लेनी पड़ेगी।
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नारद के श्राप के कारण भगवान विष्णु को राम रूप में और देवी लक्ष्मी को सीता रूप में अवतार लेना पड़ा। रावण द्वारा सीता का हरण होने के कारण राम को स्त्री का वियोग सहना पड़ा और वानरों की सहायता से राम रावण पर विजय प्राप्त कर सके।
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