प्रोफेसर सुब्रतो की कहानी, जिन्होंने बंदरों के जरिये छात्रों को जीवन का महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाया।
प्रोफेसर सुब्रतो हर बार की तरह इस बार भी क्लास में कुछ अलग प्रयोग करने वाले थे। इस बार वह अपने साथ चने की एक बोरी लेकर आए थे। सारे छात्रों को लेकर वह कॉलेज के बाग में पहुंचे, जहां कई बंदर उत्पात मचा रहे थे। चने देखकर सभी बंदर प्रोफेसर की तरफ लपके। प्रोफेसर ने सारे चने जमीन पर बिखेर दिए। बंदरों ने जल्दी-जल्दी अपने दोनों हाथों में चने भरे और कूदकर पेड़ पर चढ़ने लगे। यह दृश्य देखकर सभी छात्र हंसने लगे। पेड़ पर चढ़ते हुए एक बंदर के हाथ से चने का एक दाना नीचे गिर गया।
कोई और बंदर उसे न उठा ले, यह सोचकर वह झट से उस दाने की तरफ लपका। लेकिन उस एक दाने के चक्कर में उसके हाथ से बाकी दाने भी छूट गए। जब तक वह नीचे पहुंचा, कई और बंदर वहां पहुंच कर उस बंदर के हिस्से के सारे चने बटोर कर खाने लगे। कुछ देर तक ऐसे ही बंदरों का कार्यक्रम चलता रहा और सारे छात्र मजे लेते रहे। फिर प्रोफेसर सबको लेकर वापस क्लास पहुंचे और पूछा, तो आज आप सबने क्या सीखा? छात्र अपने-अपने तरीके से इसका जवाब देने लगे।
प्रोफेसर बोले, हम सब की जिंदगी में उपलब्धियां और सफलताएं चने के दानों के जैसी होती हैं। हमारा पूरा जीवन इसी तरह चने के दाने इकट्ठा करते-करते बीत जाता है। लेकिन इस दौड़ में हम अक्सर अपने हाथ में जो दाने हैं, उन्हें नजर अंदाज कर देते हैं और उनके लिए दौड़ते रहते हैं, जो अपने हाथ में नहीं है। या यों कहें कि हम अपनी ऊर्जा, अपना समय, अपना धन उन चीजों में व्यर्थ करते रहते हैं, जो हमारे पास नहीं है। जबकि हम यह नहीं सोचते कि जो हमारे पास है, क्या हम उसका सही उपयोग कर भी रहे हैं। प्रोफेसर बोले, हम सबकी मुट्ठी में खजाने छिपे हैं। यह हम पर निर्भर करता है कि हम उन्हें पहचान पाते हैं, या गंवा देते हैं।