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सीख: हम आवेश में आकर ऐसी हरकत कर बैठते हैं, जिस पर हमें बाद में पछतावा होता है

Thu, 02 Aug 2018 01:45 PM IST
संपादकीय डेस्क, अमर उजाला
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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अब्बास की कहानी, जिसे अस्पताल में एक अंजान व्यक्ति से किए गए दुर्व्यवहार के लिए पछतावा हुआ।

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अब्बास के पिता की अचानक तबीयत खराब हो गई। अब्बास अपने दोस्तों के साथ उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचा। अस्पताल में भीड़ ज्यादा थी, क्योंकि उस दिन अस्पताल में स्टाफ की कमी थी। एक सीनियर डॉक्टर ने उसके पिता की जांच की। उन्होंने पाया कि उसके पिता का कॉलेस्ट्रॉल बहुत बढ़ा हुआ था और ऐसा लग रहा था कि उन्हें कभी भी दिल का दौरा पड़ सकता है। डॉक्टर ने उन्हें तुरंत भर्ती होने को कहा और अन्य मरीजों को देखने चले गए।

अब्बास और उसके दोस्त नर्स का इंतजार कर रहे थे, जो उसके पिताजी को कमरे में लेकर जाए। तभी अब्बास के पीछे से एक आदमी दौड़ता हुआ आया और उससे टकरा गया। अब्बास चिल्लाया, अंधे हो क्या, दिखता नहीं है क्या तुम्हें? लेकिन वह आदमी एक मिनट के लिए भी नहीं रुका, और उसी तेजी से फिर से वहां से डॉक्टर के कमरे में दौड़ता चला गया। अब्बास ने सोच लिया, अब वह आदमी वापस आएगा, तो मैं उसे छोड़ूंगा नहीं। इतनी देर में डॉक्टर के कमरे में से जोर-जोर से किसी के चीखने की आवाजें आने लगीं। कमरे का दरवाजा खुला, तो अब्बास ने देखा, वही आदमी जो अभी तेजी से दौड़ते हुए आया था, वह कमरे से रोते हुए बाहर निकल रहा था।
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उसकी बांहों में एक छोटी-सी बच्ची लेटी हुई थी। अब्बास हैरान होकर उस शख्स को देख रहा था। पीछे से कोई बोला, अभी कुछ देर पहले ही इस बच्ची की मां इसे लेकर अस्पताल आई थी। शायद वह बच्ची किसी सड़क दुर्घटना की चपेट में आ गई। यह सुनते ही अब्बास का मुंह खुला का खुला रह गया। उस व्यक्ति के प्रति उसका गुस्सा तो गायब हो ही चुका था। वह मन ही मन सोचने लगा, मैंने उस शख्स पर चिल्लाकर कितनी बड़ी गलती कर दी। वह तो अपनी बच्ची को बचाने के लिए दौड़ रहा था।

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