ऐसे व्यक्ति को कभी नहीं होती धन की कमी
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Vidur Niti about Money: महात्मा विदुर कुशाग्र बुद्धि और दूरदर्शी होने के साथ ही स्वभाव से अत्यंत शांत और सरल थे। यही कारण था कि वे भगवान कृष्ण को भी प्रिय थे। जब कृष्ण जी महाभारत युद्ध से पहले शांति प्रस्ताव लेकर कौरवों के समक्ष गए थे, तब विदुर जी के पास ही ठहरे थे। ये महाराज धृतराष्ट्र और पांडु की तरह ही महर्षि वेदव्यास के पुत्र थे परंतु इनका जन्म दासी के गर्भ से हुआ था, जिसके कारण सभी गुणों से परिपूर्ण होने पर भी ये राजा नहीं बन सके। ये हस्तिनापुर के महामंत्री थे इसलिए महाराज धृतराष्ट्र इनसे महत्वपूर्ण विषयों पर इनसे सलाह लेते थे और हर बात पर खुलकर चर्चा करते थे। विदुर जी और धृतराष्ट्र के मध्य की चर्चा की महत्वपूर्ण बातें विदुर नीति के रूप में जानी जाती हैं। महात्मा विदुर ने सत्य के साथ-साथ व्यवहार, धन और कर्म को भी विदुर नीति में सम्मिलित किया है। आइए जानते हैं कि कैसे व्यक्ति के पास नहीं होती है कभी धन की कमी।
अनिर्वेदः श्रियो मूलं लाभस्य च शुभस्य च ।
महान् भवत्यनिर्विण्णः सुखं चानन्त्यमश्नुते ।।
उपरोक्त श्लोक के अनुसार जो व्यक्ति अपने कार्य को पूरी लग्न और निष्ठा से करता है उसे हमेशा सुख की प्राप्ति होती है। उसका जीवन सदैव धन-संपत्ति से भरा रहता है। इतना ही नहीं उसे यश, मान-सम्मान भी प्राप्त होता है। महात्मा विदुर के अनुसार इसीलिए व्यक्ति को अपने कार्य पर ध्यान देना चाहिए जिससे वह अपने लक्ष्य तक बिना किसी रुकावट के आगे बढ़े।
सुखार्थिनः कुतो विद्या नास्ति विद्यार्थिनः सुखम् ।
सुखार्थी वा त्यजेत् विद्यां विद्यार्थी वा त्यजेत् सुखम् ।।
इस श्लोक के माध्यम से आचार्य विदुर कहते हैं कि जो व्यक्ति केवल सुख की कामना करता है उसे विद्या प्राप्त होने में कठिनाई होती है। जो विद्या की प्राप्ति चाहता है वह सुख विमुख रहता है। इसलिए अगर आप सुख की इच्छा रखते हैं तो आपको विद्या अर्जित करने का विचार तजना होगा और यदि आप विद्या चाहते हैं तो जीवन में सुख का त्याग करना होगा। विद्या अर्जित करने में परिश्रम और त्याग की जरूरत होती है। अभी किए त्याग से ही बाद में ज्ञानी व्यक्ति धन और सम्मान से पूर्ण होता है।