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जीवन का आधार है सूर्य: सुदर्शन जी महाराज

Tue, 20 Nov 2012 11:46 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
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हमारा शरीर ब्रह्मांड का एक अंश है। शास्त्रों में कहा गया है कि यत पिंडेतत ब्रह्मांडे। यह शरीर पांच तत्वों से बना हुआ है। जिन तत्वों से शरीर बना है, उन्हीं तत्वों से पशु-पक्षी, पेड-पौधे, ग्रह-नक्षत्र भी बने हैं। संपूर्ण ब्रह्मांड में पृथ्वी, चंद्रमा, सूर्य, सौरमंडल, सैकडों सूर्यों से बनी नीहारिकाएं और नीहारिकाओं से बनी आकाशगंगा भी आती है। सौरमंडल अनेक ग्रहों से बना है। हमारी पृथ्वी सौरमंडल का एक छोटा अंश है। पृथ्वी सौर मंडल के एक कोने में है और सूर्य की परिक्रमा कर शक्ति संग्रह करती है। इसलिए इस पृथ्वी पर रहने वाले प्रत्येक जीव पर स्वभाविक रूप से ग्रह-नक्षत्र का गहरा प्रभाव पड़ता है।
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प्राय: ऐसा कहा जाता है कि अमुक व्यक्ति को शनिचरा ग्रह लगा हुआ है या शनि की साढेसाती लगी हुई है। इसका अर्थ है कि सौर मंडल का एक प्रभावशाली ग्रह शनि पृथ्वी के मनुष्य को प्रभावित कर रहा है। यह खोज हमारे ऋषि-मुनियों की है। विज्ञान कहता है कि पृथ्वी के केंद्र में मैग्नेटिक और फेरस ऑक्साइड है, जिसके कारण उसमें गुरुत्वाकर्षण है।

इसका सीधा अर्थ यह है कि पृथ्वी में आकर्षण शक्ति की वजह से मनुष्य का शरीर प्रतिक्षण प्रभावित होता रहता है। इस दृष्टि से मनुष्य सीधे सूर्य से प्रभाव ग्रहण करता है। हम जो सांस लेते हैं, वह ऑक्सीजन हमें परोक्ष रूप से सूर्य से ही प्राप्त होती है, क्योंकि सूर्य से ऊर्जा लेकर ही पेड़-पौधे ऑक्सीजन का निर्माण करते हैं।
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आचार्य श्री सुदर्शनजी महाराज
श्री सुदर्शनजी का जन्म 2 जून 1937 में हुआ था। आचार्य जी ने अपना संपूर्ण जीवन मानव समाज की भलाई के लिए समर्पित कर दिया और अलग-अलग रास्तों से समाज सेवा और मानव विकास की मंजिल की ओर बढ़ते गये। आचार्य ने समाज में ज्ञान का दीपक जलाने के लिए कई पुस्तकें भी लिखी। ये एक अच्छे स्कॉलर तो हैं ही साथ ही चिंतक और दार्शनिक भी हैं।
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