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सीख: ऐसे नियम किसी काम के नहीं होते, जिससे आप जिंदगी को जी भरकर जी न सकें

Sat, 28 Jul 2018 04:00 PM IST
संपादकीय डेस्क, अमर उजाला
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अहान की कहानी, जिसने एक भयावह सपना देखने के बाद बदल डाली अपनी दिनचर्या।

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अहान हर रोज की तरह ठीक छह बजे अलार्म बजने पर उठा। उठते ही वह तैयार होने लगा। ठीक सात बजे वह दौड़ लगाने चला गया। साढे सात बजे वह लौटा और आठ बजकर पांच मिनट पर नहा-धोकर कपड़े पहन कर दफ्तर जाने को तैयार था। तब तक ओवन में रखा खाना भी तैयार हो गया था, जिसे टिफिन में रखकर ठीक आठ बजे वह घर से बाहर निकल गया। और बस पकड़कर ठीक नौ बजकर पांच मिनट पर वह अपने दफ्तर में था।

ठीक दो बजे उसने लंच किया और कुछ देर चहलकदमी करने के बाद काम पर लौट गया। शाम को सात बजते ही वह दफ्तर से निकल गया और ठीक आठ बजे वापस घर पहुंच गया। थोड़ी देर टीवी देखने और फिर खाने के बाद वह ठीक दस बजे सो गया। यह अहान का रोज का नियम था। अगर वह किसी के साथ अपना सबसे ज्यादा समय बिताता था, तो वह थी उसकी घड़ी, जो हर वक्त उसकी कलाई से चिपकी रहती थी। एक दिन उसे सपना आया कि उसकी घड़ी कहीं खो गई है, जिसकी वजह से उसे उठने में थोड़ी देर हो गई है।
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उसने देखा कि वह जल्दी-जल्दी तैयार होकर बस पकड़ने के लिए भाग रहा है कि पीछे से एक तेज रफ्तार से आती गाड़ी उसे ठोकर मार देती है। उसने देखा, वह गंभीर रूप से घायल है और उसके सारे घर वाले और प्रियजन अस्पताल में इकट्ठा हैं। यह भयावह सपना देख अहान चौंककर उठा, तो देखा कि उसकी घड़ी वास्तव में रुक गई है। उसने कलाई से घड़ी उतारी और उसे किनारे रखकर फिर सो गया। जब वह उठा, तो बदल चुका था। अपने आसपास की खूबसूरती को वह निहार रहा था और पूरे मन से जी रहा था।

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