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सीख: ऐसे लोग कभी खुश नहीं रहते जो खुशियों को कल में ढूंढते हैं

Wed, 02 May 2018 03:29 PM IST
संपादकीय डेस्क, अमर उजाला
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केतन मॉल से सामान लेकर बाहर निकल ही रहा था कि उसने देखा, उसके बचपन की दोस्त मीनल किसी शख्स के साथ मॉल के अंदर घुस रही थी। मीनल को केतन करीब बीस साल बाद देख रहा था। मीनल उस शख्स का हाथ पकड़ कर ऐसे चल रही थी, जैसे दोनों के बीच बहुत प्यार हो। केतन ने सोचा, यह जरूर मीनल का पति होगा। मीनल से मिलने के लिए वह उन दोनों के पीछे-पीछे वापस मॉल के अंदर आ गया। केतन ने  मीनल को आवाज लगाई, तो वह एक बार में ही उसे पहचान गई और उससे मिलकर उसकी खुशी कई गुना बढ़ गई। दोनों वहीं मॉल की एक कॉफी शॉप में बैठकर बातें करने लगे।

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मीनल ने केतन से उसकी पत्नी के बारे में पूछा। केतन बोला, हमें तो शादी को बीस साल हो गए। शायद इसीलिए अब तुम दोनों जैसा युवा प्यार और दमकती खुशी हमारे बीच नहीं बची। मीनल के पति ने मुस्कराकर कहा, हमारी शादी को भी तो बीस साल होने को हैं। यह सुनकर केतन हैरान हो गया। तभी मीनल के पति का फोन आ गया और वह दोनों को अकेले बात करने के लिए छोड़ चले गए। केतन ने मीनल से पूछा, मैं नहीं समझ पाया कि तुम दोनों ने अपने रिश्ते को इतना युवा कैसे बना रखा है। मेरा रिश्ता मेरी पत्नी से ऐसा क्यों नहीं रहा? जबकि मैं उसकी हर ख्वाहिश आज भी पूरी करता हूं।

मीनल बोली, रिश्ते बड़ी-बड़ी चीज़ों से नहीं, छोटी-छोटी खुशियों से बनते हैं। मेरे पति रोज ऑफिस जाने से पहले आज भी ऐसे गले मिलते हैं, जैसे किसी लंबी यात्रा पर जा रहे हों। आज भी सुबह की चाय वही मुझे बनाकर पिलाते हैं। कई बार शाम को आते वक्त मेरे लिए फूल ले आते हैं। हर छुट्टी वाले दिन मेरे साथ किचन में मेरा हाथ बंटाते हैं। साथ रहने के लिए जरूरी नहीं कि हम बड़ी-बड़ी खुशियां ढूंढें। हर रोज छोटी-छोटी खुशियां, छोटे-छोटे पल हमें एक दूसरे के और करीब ले आते हैं। केतन सोचने लगा, एक अरसा हो गया छोटे-छोटे पलों में भी खुशियों को महसूस किए हुए।

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