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एक कहानी जो एहसास दिलाती है कि छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा नहीं करना चाहिए

Tue, 27 Feb 2018 02:15 PM IST
संपादकीय डेस्क, अमर उजाला
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रोहन की कहानी, जिससे मनु को यह एहसास हुआ कि छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना ठीक नहीं।

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काम के सिलसिले में मनु दिल्ली से मुंबई आया था। वह अपने खास दोस्त रोहन के घर रुका था। सुबह जब दोनों घर से निकलने लगे, तो रोहन ने मनु से कहा कि मैं अपनी गाड़ी से तुम्हें छोड़ दूंगा। वे दोनों गाड़ी की तरफ जा ही रहे थे कि आगे से एक धोबी कपड़े लेकर बिल्डिंग में घुस रहा था। वह अपने कंधे पर तीन कपड़ों की बोरियां लादे था और उसको आगे ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था। मनु रोहन से बातें करने में मसरूफ था और उसका भी ध्यान रास्ते पर नहीं था।

लिहाजा धोबी और मनु आपस में टकरा गए। धोबी का जूता मनु के जूते पर पड़ गया और वह गंदा हो गया। बस फिर क्या था, मनु उस पर बरस पड़ा। उस आदमी ने मनु से माफी भी मांगी, लेकिन मनु ने उसे जमकर खरी-खोटी सुनाई। रोहन ने बीच-बचाव करना चाहा, तो मनु ने उसको भी यह कहकर चुप करा दिया कि तुम इन लोगों को नहीं जानते। ये लोग ऐसे ही होते हैं, जानबूझ कर ऐसे काम करते हैं। खैर वे दोनों आगे बढ़े और गाड़ी से मनु के ऑफिस की तरफ जाने लगे।
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सुबह का समय था, तो रास्ते में जाम लगना स्वभाविक था। सुबह के समय हर गाड़ी वाले को जल्दी हो रही होती है कि कहीं से रास्ता मिल जाए और वह अपनी गाड़ी निकाल ले। इसी चक्कर में एक गाड़ी वाले ने रोहन की गाड़ी बगल से हल्की-सी ठोक दी और उस पर डेंट आ गया। रोहन ने उस गाड़ी वाले की तरफ मुस्कुरा कर देखा और आगे बढ़ गया।
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जब मनु ऑफिस के सामने उतरा, तो देखा कि गाड़ी पर अच्छा खासा डेंट पड़ा हुआ था। उसने रोहन से पूछा, इस पर तो अच्छा खासा डेंट आ गया है। तुमने उस गाड़ी वाले को कुछ बोला क्यों नहीं। रोहन बोला, आजकल हर गाड़ी का इंश्योरेंस होता है, डेंट तो उससे ठीक हो ही जाएगा। और जहां तक गुस्से की बात है, तो मुझे अपनी शांति और खुशी ज्यादा प्यारी है। मैं गुस्सा करके उसे खत्म नहीं करना चाहता। वैसे भी कोई जान-बूझकर तो डेंट लगाता नहीं। गुस्से का जितना असर दूसरों पर पड़ता है, उससे कहीं ज्यादा खुद पर पड़ता है।

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