यहां देवता की प्रशंसा कर रहा हूँ। देवता कैसे होते हैं? देवता ऐसे होते हैं, जो आदमी के ईमान में घुसे रहते हैं और भीतर से एक ऐसी हूक, एक ऐसी उमंग और एक ऐसी तड़पन पैदा करते हैं, जो सारे के सारे जाल-जंजालों को मकड़ी के जाले की तरीके से तोड़ती हुई सिद्धान्तों की ओर, आदर्शों की ओर बढ़ने के लिए आदमी को मजबूर कर देती है।
इसे कहते हैं देवता का वरदान। इससे कम में देवता का वरदान नहीं हो सकता। आदमी के भीतर जब गुणों की, कर्मों की, स्वभाव की विशेषताएं पैदा हो जाती हैं, तो विश्वास रखिए उसकी उन्नति के दरवाजे खुल जाते हैं। गुणों के हिसाब से दुनिया के इतिहास में जितने भी आदमी आज तक विकसित हुए हैं, किसी भी क्षेत्र में सफल हुए हैं और जिनके सम्मान हुए हैं, वे प्रत्येक व्यक्ति गुणों के आधार पर बढ़े हैं। देवता का वरदान गुण और चिंतन की उत्कृष्टता है।
संसार के महापुरुषों में से सफल व्यक्ति का इतिहास यही रहा है। सभी के सभी छोटे-छोटे खानदानों में पैदा हुए थे। छोटे-छोटे घरों में, परिस्थितियों में पैदा हुए थे; लेकिन उन्नति के ऊंचे शिखरों पर ऊंचे से ऊंचे स्थान पर पहुंचते चले गये।
लालबहादुर शास्त्री को लीजिए, जिनके ऊपर देवता का अनुग्रह था। एक ही अनुग्रह की पहचान है-जिम्मेदारी और समझदारी का होना। भक्त और भगवान के बीच में यही सिलसिला चला है। इंसान के यहां और भगवान के यहां एक ही तरीका है।