भगवान आपसे कुछ नहीं चाहता। जब आप कुछ भी करते हैं सिर्फ उसका आनंद प्राप्त करने के लिए, और उसमें से कुछ भी नहीं चाहते, वही सेवा है। सेवा से आपको तत्काल संतोष और दीर्घकालिक गुणवत्ता प्राप्त होती है। भगवान से निकटता बढ़ती है।
अपने स्वयं के भीतर भगवान को देखना ध्यान है और आपके बाजू के व्यक्ति में भगवान को देखना सेवा है। अक्सर लोगों में भय होता है कि दूसरे लोग उनका शोषण करेंगे यदि वह सेवा करेंगे।
सनकी होये बिना सजग और बुद्धिमान रहें। सेवा से योग्यता आती है और ध्यान के गहन में जाने में सहायता मिलती है और ध्यान से आपकी मुस्कुराहट वापस आ जाती है।