‘मैं खुद से प्यार करता हूं’– यह क्या बकवास है? ऐसे विचार-सिद्धांत दुनिया भर में प्रचलित हैं, खासकर अमेरिका के पश्चिमी तट पर। कैलिफोर्निया में एक लेक्चर में शामिल होने का मौका मिला। वहां वक्ता का मत था, ‘आपको अपने प्रति करुणा रखनी चाहिए।’ मैंने कहा, ‘पसंद करने, प्रेम करने और करुणा रखने के लिए, आपको दो जीवों की जरूरत है। अगर आप दो जीव पाल लेते हैं, तो या तो आप पागल हैं या प्रेतग्रस्त।
या तो आपको मनोचिकित्सक की जरूरत है या किसी ओझा की।’ एक व्यक्ति का मतलब है ‘जो आगे और बंट न सके।’ अगर आपने खुद को ऐसा बना लिया है कि आपके कोई दोस्त नहीं हैं और आप अकेले रह नहीं सकते, तो आप अपने अंदर दो लोग बना लेते हैं। ऐसा खेल न खेलें।
मानसिक संतुलन और असंतुलन के बीच बहुत बारीक लकीर है। अगर आप लगातार उसे धकेलते रहे, तो आप दूसरी ओर जा गिरेंगे। शंकरन पिल्लै ने बंगलौर के निमहैंस इंस्टीट्यूट के मनोचिकित्सा वार्ड में फोन किया ‘क्या कमरा नं 21 में मि.पिल्लै हैं?’ रिसेप्शनिस्ट ने जवाब दिया, ‘नहीं, वह यहां नहीं हैं।’ ‘हे भगवान, फिर यह सच है कि मैं भाग आया!’एक बार जब आप अपने आप को बांटने का यह खेल खेलेंगे, तो आपको पता नहीं चलेगा कि आप कहां हैं।
आप एक व्यक्ति हैं – जो आप हैं, वह कभी बंटा हुआ नहीं होना चाहिए। ‘खुद से प्रेम करो। अपने आप में यकीन रखो। खुद के प्रति करुणा रखो,’ इन सब विचारों से आप बीमारी को न्यौता दे रहे हैं। अगर आप ऐसा करते हैं तो आप एक मनोवैज्ञानिक खेल खेल रहे हैं जिससे आप पागलपन की ओर बढ़ रहे हैं।
ऐसे लोगों के साथ रहने पर कुछ भी असामान्य नहीं लगेगा लेकिन हालात आपके खिलाफ हो गये, तो आप पागल हो जाएंगे। हालात आपका साथ देते हैं, तो आप ऐसे खेल खेलकर किसी तरह बच सकते हैं।