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Seeta Navmi 2023: 29 अप्रैल को सीता नवमी, जानिए महत्व और सुखद जीवन जीने के सूत्र

Thu, 27 Apr 2023 12:20 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान विष्णु के अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की प्राणप्रिया, सर्वमंगलदायिनी, पतिव्रताओं में शिरोमणि, जगत जननी माता सीताजी का प्राकट्य हुआ।
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Seeta Navmi 2023: भूमि से उत्पन्न होने के कारण उन्हें भूमात्मजा और राजा जनक की पुत्री होने से उन्हें जानकी भी कहा जाता है। - फोटो : social media
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विस्तार
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मां लक्ष्मी का अवतार माता सीता भूमि रूप हैं। भूमि से उत्पन्न होने के कारण उन्हें भूमात्मजा और राजा जनक की पुत्री होने से उन्हें जानकी भी कहा जाता है। वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान विष्णु के अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की प्राणप्रिया, सर्वमंगलदायिनी, पतिव्रताओं में शिरोमणि, जगत जननी माता सीताजी का प्राकट्य हुआ। यह दिन जानकी नवमी या सीता नवमी के नाम से जाना जाता है।

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सीता नवमी का महत्व
धर्मशास्त्रों के अनुसार इस पावन पर्व पर जो भी भगवान राम सहित मां जानकी का व्रत-पूजन करता है उसे पृथ्वी दान का फल व समस्त तीर्थ भ्रमण का फल स्वतः ही प्राप्त हो जाता है एवं समस्त प्रकार के दुखों, रोगों व संतापों से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने वाली सुहागिन स्त्रियों को अखंड सौभाग्य मिलता है और कुंवारी कन्याओं को अच्छे वर की प्राप्ति होती है। इस दिन घर में रामायण का अखंड पाठ करने से घर की नकारात्मकता दूर होती है। घर में सुख-शांति आती है। मान्यता है कि जिन कन्याओं के विवाह में विलंब हो रहा हो या फिर जिन्हें मनचाहा जीवनसाथी मिलने में दिक्कतें आ रही हो, उन्हें इस दिन विशेष रूप से पूजा और व्रत करना चाहिए। 
 
सुखद जीवन जीना सिखाती हैं मां सीता

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