छोटे से गांव के एक आदमी की कहानी, जिसने रामचंद्र जी को मेहनत और परिवार का महत्व समझाया।
रामचंद्र एक आईटी कंपनी के मालिक थे। उनके पास घर, महंगी गाड़ियां तथा ऐश-ओ-आराम की तमाम चीजें थीं, फिर भी उनके मन में शांति नहीं थी। उन्होंने तय किया कि सारी दुनियादारी छोड़ वह किसी एकांत स्थान में जाकर कुछ समय बिताएंगे। अगले दिन अपने कुछ साथियों के साथ वह यात्रा पर निकल पड़े। शुरुआत के लिए उन्होंने पास के एक गांव को चुना। गांव के लोग उन्हें देख बहुत खुश हुए। उनको लगा कि ऐसे नामी शख्स के आने से गांव की शोभा बढ़ जाएगी।
सब उनकी खातिरदारी में लग गए। पर वहां भी रामचंद्र जी को शांति नहीं मिली। वह वहां से आगे बढ़ने को थे, पर निकलते-निकलते रात हो गई। एक आदमी ने उनसे निवेदन किया कि रात का समय यात्रा के लिए सही नहीं होगा। रामचंद्र जी ने उसकी बात मान ली और उसी के घर पर रुक गए। उस आदमी ने रामचंद्र जी और उनके साथियों को बिस्तर पर सुलाया और खुद पत्नी और बच्चों के साथ जमीन पर सो गए।
रामचंद्र जी यह देखकर काफी हैरान हो गए कि वह पूरा परिवार रात भर इतनी सख्त जमीन पर भी इतने चैन से कैसे सो सकता है! यही सोचकर उन्हें रात भर नींद नहीं आई। अगले दिन सुबह जब पूरा परिवार उठा, तो रामचंद्र जी ने पूछा, इतनी सख्त जमीन पर भी आप परिवार समेत चैन की नींद भला कैसे सो पाए? वह आदमी बोला, इस घर में मेरी मेहनत की खुशबू आती है। मैं जब रात में सोता हूं, तो मुझे यह याद भी नहीं रहता कि मैं कहां सो रहा हूं। मुझे मेरी सच्चाई और मेरे सत्कर्म अपनी गोद में ले लेते हैं और मैं अपने परिवार के प्यार से परिपूर्ण होकर आराम से सो जाता हूं। रामचंद्र जी ने अपने सभी साथियों से माफी मांगी और बोले, जिंदगी भर मैंने अपने काम के लिए अपने परिवार से समझौता किया। आज इस छोटे से गांव के इस व्यक्ति ने मुझे बहुत बड़ा सबक दे दिया।