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सीख: हम अक्सर पूरी बात जाने बिना लोगों के बारे में राय बना लेते हैं

Mon, 16 Jul 2018 03:35 PM IST
संपादकीय डेस्क, अमर उजाला
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लक्ष्य की कहानी, जिसे बस में हुए हादसे से एक गूंगे लड़के की उसके प्रति सदिच्छा के बारे में पता चला।

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लक्ष्य घर में घुसा ही था कि पत्नी की नजर उस पर पड़ी। वह बोली, आज इतने गुमसुम क्यों हो? लक्ष्य बोला, जिंदगी भी कितनी अजीब है! पत्नी बोली, ऐसा क्या हो गया? लक्ष्य बोला, मैंने कल एक लड़के के बारे में बताया था, तुम्हें याद है? पत्नी बोली, हां वही, जो तुम्हें परेशान कर रहा था। लक्ष्य बोला, वह परेशान नहीं कर रहा था। बस कुछ कहना चाहता था। पत्नी बोली, पर तुम्हीं ने तो बताया था कि वह बार-बार बस की सीट से खड़े होने का इशारा कर रहा था? लक्ष्य बोला, हां, पर उसका मकसद परेशान करना नहीं था।

पत्नी बोली, यह तुम्हें आज कैसे समझ में आया? लक्ष्य बोला, आज मैं उसी बस से दोबारा वापस आया। उस बस की जिस सीट पर मैं कल बैठा था, उसे आज वहां से हटा दिया गया था। पत्नी ने पूछा, क्यों? लक्ष्य बोला, कल उस बस में किसी के साथ हादसा हो गया। उस सीट की गद्दी खराब हो चुकी थी, और उसके नीचे से एक बड़ी-सी कील निकल रही थी। वह शख्स जब उस सीट पर बैठा, तो वह कील उसकी खाल फाड़ते हुए उसके पैर में घुस गई।
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जब तक उसको अस्पताल पहुंचाते, उसके पूरे पैर में जहर फैल गया, जिसकी वजह से उसका पैर काटना पड़ा। पत्नी ने पूछा, पर तुम भी तो कल उसी सीट पर बैठे थे। लक्ष्य बोला, हां, इसीलिए वह लड़का बार-बार मेरी शर्ट खींचकर मुझे वहां से उठने को कह रहा था। वह गूंगा था और उसे पता चल गया था कि उस सीट के नीचे कील है। पर मेरी वजह से उसे बस से नीचे उतार दिया गया। मैं समझ नहीं पाया कि वह मेरा ही भला चाह रहा था। पत्नी ने पूछा, पर यह बात तुम्हें आज कैसे समझ में आई? लक्ष्य बोला, वह लड़का आज गुलाब का एक फूल लेकर बस के पास मेरा इंतजार कर रहा था। वह सिर्फ यह देखने आया था कि मुझे कुछ हुआ तो नहीं। 

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