जेन गुरु रयोकान को उनकी बहन ने कोई जरूरी बात करने के लिए अपने घर आने का निमंत्रण दिया। वहां पहुंचने पर रयोकान की बहन ने उनसे कहा, अपने भांजे को समझाइए। वह कोई काम नहीं करता। अपने पिता के धन को वह मौज-मस्ती में उड़ा देगा। केवल आप ही उसे राह पर ला सकते हैं।
रयोकान अपने भांजे से मिले। वह भी अपने मामा से मिलकर बहुत प्रसन्न था। मामा भांजे ने बचपन से जवानी तक काफी साल साथ गुजारे थे। यहां तक कि जेन मार्ग अपनाने से पहले तक भांजा रयोकान के साथ था। रयोकान जब बहन से मिलकर भांजे के पास आया, तो वह समझ गया था कि मामा उसके पास क्यों आए थे। उसे आशंका थी कि रयोकान उसकी आदतों के कारण उसे अच्छी डांट पिलाएंगे। उसे सुधरने और अपनी मां के साथ अच्छा और जिम्मेदार बनने के लिए कहेंगे।
लेकिन रयोकान ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा। अगली सुबह जब उनके वापस जाने का समय हो गया, तो वह अपने भांजे के पास गए और उससे बोले, क्या तुम मेरी जूतियों के तस्मे बांधने में मेरी मदद करोगे? मुझसे अब झुका नहीं जाता और मेरे हाथ कांपने लगे हैं। भांजे ने खुशी-खुशी रयोकान की जूतियों के तस्मे बांध दिए।
शुक्रिया, रयोकान ने कहा, दिन-प्रतिदिन आदमी बूढ़ा और कमजोर होता जाता है। तुम्हें याद है, मैं कभी कितना बलशाली और कठोर हुआ करता था? हां, भांजे ने कुछ सोचते हुए कहा, मुझे याद है। आप तब उचक कर पेड़ की डाली से लटक जाते थे और दूसरे हाथ से फल तोड़कर वापस जमीन पर कूद आते थे।
लेकिन अब आप बहुत बदल गए हैं। कहते हुए भांजे के भीतर कुछ सोए हुए भाव जाग रहे थे। उसे अनायास लगने लगा कि उसके रिश्तेदार, उसकी मां और उसके सभी शुभचिंतक लोग अब बुजुर्ग हो गए थे। उन सभी ने उसकी बहुत देखभाल की थी और अब उनकी देखभाल करने की जिम्मेदारी उसकी थी। उस दिन से उसने सारी बुरी आदतें छोड़ दीं और सबके साथ-साथ अपने भले के लिए काम करने लगा।